आज रूप चौदस यानि नरक चतुर्दशी पर करें ये काम, खुल जाएगी किस्मत

आज छोटी दिवाली के दिन रूप चौदस यानि की नरक चतुर्दशी मनाया जाता है। इसे यम चतुर्दशी भी कहा जाता है इस दिन को आम लोग छोटी दिवाली भी कहते हैं। इस दिन लोग विशेष रूप से नर्क से मुक्ति पाने के लिए यम देव की पूजा अर्चना करते हैं। ऐसी मान्यता है की इस दिन पूजा करने से और व्रत रखने से यम देव खुश होते हैं और रूप और धन का आशीर्वाद तो देते ही हैं साथ ही नर्क से भी मुक्ति दिलाते हैं। आये आपको बताते हैं क्या है इस दिन की मान्यता और क्यों क्यों की जाती है इस दिन यम देव की पूजा।

नरक चतुर्दशी को क्यों कहा जाता है रूप चौदस

एक पुराणी कहानी के अनुसार प्राचीनकाल में एक राजा हुआ करते थे हिरण्यगभ नाम के राजा जिन्होंने अपना सारा राज पाठ छोड़कर तप करने की ठान ली थी। कई सालों के तप के बाद उनके शरीर में कीड़े लग गए थे जिससे उनकी सुंदरता बहुत ख़राब होगयी थी। इस बात की जानकारी उन्होंने नारद मुनि को दी तो नारद मुनि ने उन्हें रूप के देवता श्री कृष्ण की कृष्ण पक्ष के दिन आराधना करने की हिदायत दी और पुरे शरीर पर लेप लगा कर सूर्योदय के समय सूर्य की रोष नई में बैठने को कहा। राजा हिरण्यगभ ने ये उपाय किया और उनकी सुंदरता फिर से वापिस लौट आयी, इसलिए उस समय से ही इस दिन को रूप चौदस के रूप में मनाया जाता है।

इस विधि से करे नरक चतुर्दशी के दिन पूजा

आज 18 अक्टूबर के दिन नरक चतुर्दशी मनाया जाता है। इस दिन सुबह सूर्योदय के समय तिल का तेल लगाकर शरीर पर फिर स्नान करें और उसके बाद अपामार्ग के टहनियों से मिट्टी लेकर उसे सर पर लगाएं और और फिर धीरे धीरे सर पर पानी डालते हुए स्नान करें। इसके बाद पानी में काला तिल डालकर यम देव को अर्पण करें। इसके बाद सम्पूर्ण घर आँगन में दिया जलाएं और पूजा पाठ पूरी विधि विधान के साथ निपटाएं। पूजा करते समय इस यम मंत्र का जाप जरूर करें “यमय धर्मराजाय मृत्वे चान्तकाय च |वैवस्वताय कालाय सर्वभूत चायाय च”