30 साल बाद गुरू की राशि में शनि देव जानें आप पर क्‍या होगा असर

हर किसी के कुंडली में शनिदेव की छाया होती है और जब तक ये छाया होती है व्‍यक्ति सावधान हो जाता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि शनि वश्चिक राशि में मार्गी हो रहे हैं। इससे पहले ये 6 अप्रैल को वक्री हुए थे। लगभग 141 दिन के दौरान वक्री रहने के बाद शनि मार्गी हो रहे हैं जिसका प्रभाव सभी जातकों पर पड़ेगा लेकिन कुछ खास राशि वाले होंगे जो मालामाल हो जाएंगे। शनि को न्याय का कारक ग्रह के रूप में माना जाता है।

कहते हैं कि राहू केतू ये ऐसे ग्रह हैं जिसके सिर्फ नाम से ही अच्‍छे अच्‍छे लोग कांप जाते हैं क्‍योंकि इसका प्रभाव एक पल में अच्‍छे अच्‍छों को खाक कर देता है। व्‍यक्ति भले ही पैसे से या फिर बल से बलवान हो लेकिन इस ग्रह के प्रभाव से लोगों के भाग्‍य पलट जाते हैं। कहते हैं कि इस ग्रह के छाये मात्र से व्‍यक्ति की जिंदगी तबाह हो जाती है। लेकिन वही जरा सोचिए अगर ये राहू केतु आप पर मेहरबान हो जाए तो क्‍या होगा। ऐसा आपने कभी सोचा नहीं होगा। लेकिन आपको बता दें कि ये दो हर डेढ़ वर्ष पर अपनी राशि बदलते रहते हैं।

इस बार भी ये अपनी राशि परिवर्तन कर रहे है वहीं इसका प्रभाव किसी राशि के लिए लाभप्रद हो सकता है तो किसी के लिए नुकसानदेह भी। बता दें कि इन दोनों ग्रहों को छाया ग्रह कहा जाता है। माना जाता है कि शनि के अनुचर होते हैं राहु और केतु। इस परिवर्तन को ज्योतिषिय घटना भी माना जाता है क्‍योंकि इसके परिवर्तन से राशियों के जिंदगी पर काफी गहरा प्रभाव होता है। अगर ग्रहों की बात करे तो राहु और केतु दोनों ही नीच श्रेणी के ग्रह है, यानि इन्हे नीचे की श्रेणी में रखा जाता है इसलिए ऐसा माना जाता है, कि जिस व्यक्ति की राशि में इन ग्रहो का प्रवेश होता है, उनकी जिंदगी में तूफ़ान आ जाता है।

बरहलाल ये दोनों ग्रह ही अपनी राशि बदल रहे है इसलिए कुछ लोगों को तो 2020 तक काफी परेशानियों का सामना करना ही पड़ता है। राहु का चंद्रमा की राशि और केतु का शनि की राशि पर संचरण होगा। बताया जा रहा है कि 30 साल बाद शनि का देव गुरू बृहस्पति गुरू की राशि में गोचर भ्रमण होगा। ज्‍योतिष शास्त्र में शनि को दंडनायक और अपने कर्मों के फल के अनुसार परिणाम देने वाला ग्रह माना गया है।

ज्‍योतिष के अनुसार अक्‍सर शनि अपनी राशि ढाई साल में बदलते हैं। वहीं शनिदेव अपनी धीमी गति के लिए भी जाने जाते हैं यही कारण है कि वो जब किसी पीछे लग जाते हैं तो उसका पीछा नहीं छोड़ते। शनि से बचने के लिए लोग शमी वृक्ष लगाते हैं शनि मंत्र, शनि चालीसा, हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। वहीं अंकज्योतिष का मानना है कि इस बार 8 अंकों के स्वामी ग्रह शनि देव हैं और इस साल शनि का राशि परिवर्तन 26 जनवरी और 26 अक्टूबर को हो रहा है जिसका मूलांक भी 8 है।