आखिर में महाभारत की इस महान स्त्री ने नेत्रहीन होने के बावजूद भी कैसे दिया सौ पुत्रों को जन्म

धृतराष्ट्र जन्मजात नेत्रहीन थे, मगर उनकी पत्नी गंधारी अपनी इच्छा से नेत्रहीन थी। किंतु इन दोनों की इच्छा थी कि पांडु से पहले इनकी कोई संतान हो जाए। क्योंकि नई पीढ़ी का सबसे बड़ा पुत्र ही राजा बनता। समय बीता गंधारी गर्भवती हुई। महीने गुजरते गए। नौ महीने दस महीनों में बदले। ग्यारह महीने हो गए लेकिन गंधारी को कुछ नहीं हुआ। तब गंधारी को ऐसी परिस्थितियों में घबराहट होने लगी। फिर उन्हें पांडु के बड़े पुत्र यानि की युधिष्ठिर के जन्म की खबर मिली। इस खबर को सुनते ही धृतराष्ट्र और गंधारी दोनों ही शोक में डूब गए।

बारह महीने बीतने के बाद भी गंधारी बच्चे को जन्म नहीं दे पा रही थी। ऐसे में निराश होकर वो बोली ये क्या हो रहा है। ये बच्चा जीवित भी है या नहीं। ये इंसान है या कोई पशु। ताश में आकर गंधारी ने जोर से अपने पेट पर मुक्के मारे। मगर कुछ भी नहीं हुआ। फिर गंधारी ने अपने एक नौकर को एक छड़ी लाने के लिए कहा और उससे अपने पेट पर वार करने के लिए बोला। उसके बाद गंधारी का गर्भपात हो गया और मांस का एक काला टूकड़ा बाहर आया। मांस के उस टूकड़े को देखकर पूरा हस्तिनापुर डरावनी आवाजों से आतंकित हो उठा। ये शुभ संकेत नहीं थे। मतलब था कि कुछ बुरा होने वाला है।

पुराने समय में एक बार व्यास ऋषि एक लंबी यात्रा से लौटे थे। तब गंधारी ने उनके जख्मी पैरों पर मरहम लगाया था और उनकी सेवा की थी। तब गंधारी की सेवा से खुश होकर उन्होंने गंधारी से कहा कि तुम जो चाहे मुझसे मांग सकती हो। इसपर गंधारी ने व्यास जी से मांगा कि मुझे सौ पुत्रों की प्राप्ति हो। व्यास जी ने तथास्तु कहा और कहा कि ऐसा ही होगा। तुम्हें सौ पुत्रों की ही प्राप्ति होगी।

गर्भपात के बाद गंधारी ने व्यास जी को बुलाया और उनसे कहा कि ये क्या है आपने तो मुझे वरदान दिया था कि मुझे सौ पुत्रों की प्राप्ति होगी। सौ पुत्रों के बजाए मैंने एक मांस का लोथड़ा जन्मा है जो इंसान भी नहीं लगता, ये तो कुछ और ही लगता है। इसे कहीं जंगल में फेंक दो या इसे कहीं दफना दो। गंधारी की इन बातों को सुनकर व्यास जी बोले आजतक मेरी कोई भी बात गलत नहीं निकली है। और ना ही अब होगी। वह जैसा भी है, मांस का वही लोथड़ा लेकर आओ। इसके साथ ही व्यास जी ने 100 मिट्टी के घड़े, तिल का तेल और तमाम जड़ी- बूटियां भी लाने के लिए कहा। उन्होंने उस मांस के टूकड़े को 100 टूकड़ों में बांटा और उन्हें घड़ों में बंद करके तहखानों में रख दिया फिर उन्होंने देखा कि एक छोटा सा टूकड़ा बच गया। वे बोले मुझे एक और घड़ा लाकर दो। तुम्हारे 100 बेटे और 1 बेटी होगी। उन्होंने फिर इस छोटे से टूकड़े को एक और घड़े में डालकर उसे भी तहखाने में रख दिया।

एक और साल बीत गया और साल बीतने के बाद 100 पुत्रों की और 1 पुत्री की प्राप्ति गंधारी को हुई। इसलिए कहा जाता है कि गंधारी दो साल तक गर्भवती रही।