सोमवती अमावस्‍या की शाम करें ये उपाय, जीवन से हमेशा के लिए दूर हो जाएगी दरिद्रता

सोमवती अमावस्‍या जो कि नाम से ही समझ आ रहा है कि ये इस साल में जो अमावस्या है वो सोमवार के दिन पड़ रहा है इसलिए इसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। जानकारी के लिए बता दें कि ये अनोखी तिथि साल में एक ही बार आती है और ये खास इसलिए है क्‍योंकि सोमवार का दिन भगवान शिव का माना जाता है, इसलिए इस अमावस्या का विशेष महत्व होता है। विवाहित स्त्री अपने पति की लम्बी आयु के लिए इस व्रत को पूरी श्रद्धा से रखती है। पितृ दोष व काल सर्प योग वालों के लिए इस पूजा का महत्त्व बहुत होता है।

शास्त्रों में माना जाता है कि माघ, पौष के महीने में सुबह सुबह उठकर नदी में स्‍नान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है। वहीं अगर सोमवती अमावस्‍या के दिन खासकर कोई व्‍यक्ति सुबह उठकर स्‍थान कर लेता है तो उसका ये पुण्य कई हजार गुना बढ़ा देता है। सोमवती अमावस्या ज्येष्ठ-असाढ़ (जून-जुलाई) के महीने में आती है। इस बार ये 21 अगस्त और 18 दिसम्बर के दिन पड़ेगी। इस दिन उपवास रखा जाता है, व पीपल के पेड़ की पूजा करते है। पौष माह के आने वाली सोमवती अमावस्या को इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य समृद्ध, स्वस्थ्य और सभी दुखों से मुक्त होगा।

ऐसा भी माना जाता है कि स्नान करने से पितरों कि आत्माओं को शांति मिलती है और जिन लोगों की कुंडली में विष योग, काल सर्प दोष, अमावस्या दोष है, वो लोग इस दिन अपने दोष का निवारण कर सकते हैं। सोमवती अमावस्या एक तरह से पूर्णरूप से भगवान शिवजी को समर्पित होती है इसलिए इस दिन मां गंगा में स्नान करना काफी शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि गंगा में अगर स्‍नान न कर सकें तो आप किसी भी पास में नदी या सरोवर में स्नान करना चाहिए। इस दिन भगवान शिव की पूजा अराधना करने से आपकी हर मनोकामना पूरी होती है।

उपाय

1- माना जाता है कि जो व्‍यक्ति इस दिन तुलसी की परिक्रमा कर लेता है उसके जीवन से दरिद्रता: दूर हो जाती है। इसलिए सोमवती अमावस्या को स्नान ध्यान के बाद तुलसी की 108 परिक्रमा करें।

2- सोमवती अमावस्या को किया गया व्रत काफी फलदाई भी होता है।

3- सोमवती अमावस्या के दिन खासकर सूर्य देवता को अर्घ्य देने का नियम है इससे गरीबी दूर हो जाती है।

4- सोमवती अमावस्‍या के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक और उनकी पूजा अर्चना करने से मनवांछित फल मिलते हैं।

5- सोमवती अमावस्‍या की शाम को पीपल के पेड़ की पूजा करने व दीपक जलाने से भी दरिद्रता दूर हो जाएगी।

6-उपलों की आग में गुड़-घी का धूप करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।