दिलचस्प.. तो इसलिए राज कपूर अपनी फिल्म की हर एक्ट्रेस को सफ़ेद साड़ी पहनाते थे

अगर हम बॉलीवुड गलियारों की बात करे तो आज हम एक ऐसे दिग्गज एक्टर के बारे में बात करने जा रहे है, जिससे आप सब बखूबी वाकिफ है. जी हां आपकी जानकारी के लिए बता दे कि आज हम आपको एवरग्रीन राज कपूर के बारे में कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे है, जिनके बारे में जान कर आप भी हैरान रह जायेंगे. अब ये तो सब जानते है कि राज कपूर न केवल एक अच्छे एक्टर थे, बल्कि कपूर खानदान के वो हीरे भी थे, जिन्हे कभी नहीं भुलाया जा सकता. मगर ये बात बहुत कम लोग जानते है कि राज कपूर का असली नाम रणबीर राज कपूर था. हालांकि बाद में उन्होंने अपना नाम बदल कर राज कपूर रख लिया था. शायद यही वजह है कि ऋषि कपूर के बेटे का नाम भी रणबीर है.

इसके इलावा आपको बता दे कि राज कपूर जी ने दसवीं में ही अपनी पढ़ाई को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था. यानि उन्होंने दसवीं में ही अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी. वही अगर उनके फ़िल्मी करियर की बात करे, तो उनका फ़िल्मी करियर भी आसान नहीं था. आपको जान कर ताज्जुब होगा कि राज कपूर जी ने महज ग्यारह साल की उम्र में ही फिल्मो में काम करना शुरू कर दिया था. जी हां उन्होंने ग्यारह साल की उम्र में फिल्म इंकलाब से अपना डेब्यू किया था. हालांकि हीरो के तौर पर उनकी पहली फिल्म नीलकमल थी, जो 1947 में बनी थी. इसके बाद राज कपूर जी ने साल 1948 में आर के प्रोडक्शन हाउस खोला.

 

यहाँ तक कि नरगिस और राज कपूर जी ने फिल्म बरसात में जो पोज़ दिया था, उसी को आर के प्रोडक्शन का लोगो बना दिया गया. गौरतलब है कि राज कपूर जब पहली बार नरगिस से मिलने उनके घर गए, तब नरगिस किचन से भाग कर आयी थी. जी हां वो किचन से भाग कर आयी और उन्होंने दरवाजा खोला. बता दे कि तब उनके माथे पर थोड़ा सा आटा लगा था और बाद में यही सीन राज साहब ने अपनी फिल्म बॉबी में दर्शाया था. इसके बाद महज चौबीस साल की उम्र में उन्होंने फिल्म आग का निर्देशन किया.

बता दे कि राज साहब एक्टर बनने से पहले म्यूजिक कम्पोज़र बनना चाहते थे. आपको जान कर ताज्जुब होगा कि राज साहब वो पहले निर्देशक थे, जिन्होंने दो इंटरवल के साथ पांच घंटे की एक हिंदी फिल्म बनाई थी. जिसका नाम मेरा नाम जोकर था. वैसे बहुत कम लोग जानते है कि राज कपूर जी ने जब अपनी पत्नी कृष्णा को सफ़ेद साडी में देखा, तो वो उनसे इतना प्रभावित हुए कि अपनी हर फिल्म की एक्ट्रेस को सफ़ेद साडी पहनाने लगे.

जहाँ एक तरफ भारत सरकार के सिनेमा जगत ने राज साहब को दादा साहब फाल्के का अवार्ड दिया, वही दूसरी तरफ डाक विभाग ने उनकी तस्वीर के साथ टिकट भी जारी किया. बरहलाल हम तो यही कहेगे कि भगवान् ऐसे दिग्गज लोगो को बहुत कम ही बनाते है.