176 साल बाद ग्रहण काल में बन रहा ऐसा अद्भुत संयोग, यह 4 काम करना होगा मंगलकारी

जैसा के हम सभी जानते हैं की वर्ष 2018 का आगमन हो चुका है | और साथ ही हमारे भारत में तो नए वर्ष के आते ही अधिकतर लोग अपने राशिफल, ग्रह-नक्षत्रो की जानकारी के लिए बहुत ही उत्सुक और जिज्ञासु नजर आते है | हमारे भारत में जैसे ही नया वर्ष आता है तो अधिकतर लोग सबसे पहले ज्योतिष के पास पहुंच जाते है | और साथ ही लोगों में ग्रहणों के प्रति खासा उत्सुकता नजर आती है | ऐसे में कई लोगों में ग्रहणों के प्रति उत्सुकता तो कई लोगो में ग्रहणों के प्रति भय देखने को मिलता है | हर एक वर्ष में ग्रहणों का अपना ही एक मह्त्व है |

हम आपको बता दें की की हमारे इस नए वर्ष 2018 का पहला चंद्र ग्रहण होगा | यह एक पूर्ण चंद्रग्रहण है जो की लगभग 77 मिनट तक रहेगा | हमारे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह सच में एक काफी बड़ा चंद्रग्रहण है जो की  शाम 5.58 मिनट पर शुरू हो रहा है और यह ग्रहण रात 8.41 तक चलेगा | यह चन्द्र ग्रहण वर्ष का पहला और सदी का दूसरा सबसेलम्बा चन्द्र ग्रहण है | इस दिन 12 घंटे तक भगवान के दर्शन करना अशुभ जाएगा, जिस कारण से मंदिरों के पट बंद रहेंगे इस दौरान किसी भी तरह की पूजा नहीं की जा सकती है |इसके साथ ही हम आपको यह भी बता दे की भारत के साथ-साथ यह चंद्रग्रहण पुरे उत्तरीय अमेरिका ,प्रशांत क्षेत्र से लेकर पूर्वी एशिया में भी देखने को मिलेगा |

तो चलिए हम आपको बताते है की यह ग्रहण इतना ख़ास और महत्वपूर्ण क्यों है | इस ग्रहण की महत्ता को समझने के लिए हम आपको इस ग्रहण के कुछ अनोखे राज़ बताते हैं |

  • यह चन्द्र ग्रहण पहले तो माघ पूर्णिमा के दिन लगने जा रहा है जो अपने-आप में ही काफी ख़ास बात है |
  • पंडित आचार्य राकेश कुमार शुक्ल जी के अनुसार 31 जनवरी को होने वाला यह चंद्रग्रहण पुष्य नक्षत्र में होने जा रहा है । यह वाकई एक महासंयोग है और इस संयोग के दौरान मनुष्यों के लिए कुछ ऐसे कार्य है जिन्हें ज्योतिषो के अनुसार वर्जित बताया गया है |
  • दूसरा तो ये की यह संयोग 176 साल बाद होगा इसका प्रभाव सभी बारह राशियों पर कुछ-न-कुछ अवश्य ही पड़ेगा। पंडित आचार्य राकेश कुमार शुक्ल जी ने बताया कि 31 जनवरी को लगने वाला यह चंद्रग्रहण पुण्य नक्षत्र में होगा। यह संयोग 176 साल बाद हो रहा है।
  • ग्रहण
  • 35 वर्ष बाद होने वाल यह चंद्र ग्रहण तीन वर्णों में दिखायी देगा। यह अपने आप में एक अद्भुत घटना है। उन्होंने बताया कि ग्रहण का स्पर्श शाम 5:15 बजे से होगा।
  • ग्रहण के अनिष्टकारी प्रभाव से बचने के लिए ग्रहण काल में स्नान, दान, मंत्र, तीर्थ स्नान करना मंगलकारी होता है। उन्होंने कहा कि ग्रहणकाल में मूर्ति स्पर्श करना, निद्रा, भोजन करना, तेल लगाना, नाखून काटना वर्जित है।
  • पूर्ण खग्रास 6:20 बजे से होगा। 10:42 बजे ग्रहण समाप्त होगा। यह चंद्रग्रहण श्लेषा नक्षत्र और कर्क राशि में घटित हो रहा है, इसलिए कर्क राशि पर इसका अनिष्टकारी प्रभाव होगा।
  • इसी के साथ मंत्रों का जाप कई गुणा फलदायक माना जाएगा। ऊं क्षीरपुत्राय विह्महे अमृत तत्वाय धीमहि तन्नो चंद्रः प्रचोदयात्।। चंद्रग्रहण के सूतक के दौरान इस मंत्र का जाप करना सबसे लाभकारी माना जाता है |