fbpx

रेलवे के इस नए नियम के बारे में जानने के बाद सच में उड़ जाएगी आपकी नींद

इस दुनिया में ऐसे नाजाने कितने लोग है जो हर रोज रेलवे में सफर करते है. हालांकि रेल में सफर करने के दौरान उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. मगर ये छोटी मोटी मुश्किलें उनके रोजमर्रा के जीवन का ही हिस्सा होती है. गौरतलब है कि अगर आप भी भारतीय रेल में सफर करते है, तो ये खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है. जी हां अगर आप हर रोज या कभी कभी रेल में सफर करते है, तो आपको इस खबर की तरफ ध्यान जरूर देना चाहिए. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि रेलवे ने हाल ही में एक नया नियम बनाया है और इस नियम के बारे में जान कर आपकी भी नींद उड़ सकती है.

गौरतलब है कि रेल में सफर करने के दौरान आपने रेल में सोने को लेकर लोगो के बीच कई बार झगड़े होते हुए तो देखे ही होंगे. ऐसे में इन झगड़ो को देखते हुए रेलवे ने अपने नए नियम के तहत सोने के एक घंटे में कमी कर दी है. जी हां अगर हम सीधे शब्दों में कहे तो रेलवे बोर्ड की तरफ से जो सर्कुलर जारी हुआ है, उसके अनुसार आरक्षित कोचों के यात्री अब रात को दस बजे से लेकर सुबह केवल छह बजे तक ही सो सकते है, ताकि दूसरे लोगो को बचे हुए घंटो में सीट पर बैठने का मौका मिल सके. वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इससे पहले सोने का आधिकारिक समय नौ बजे से सुबह छह बजे तक ही था.

गौरतलब है कि यह सर्कुलर इकतीस अगस्त को जारी किया गया था. हालांकि इस सर्कुलर में कुछ गिने चुने यात्रियों को छूट भी दी गई है. जी हां आपकी जानकारी के लिए बता दे कि जो लोग यानि जो यात्री बीमार, दिव्यांग या जो महिलाएं गर्भवती होंगी, उन्हें पूरा सहयोग देने की विनती की गई है. बरहलाल यानि इन यात्रियों को ज्यादा समय तक सोने की अनुमति दे दी गई है. वही इस बारे में मंत्रालय के प्रवक्ता अनिल सक्सेना का कहना है कि उन्हें सोने के प्रबंध को लेकर यात्रियों की परेशानी के बारे में आधिकारिक रूप से फीड बैक मिला था. ऐसे में इसके लिए उनके पास पहले से ही एक नया नियम मौजूद है.

 

इसके बाद उन्होंने कहा कि हम इस नियम को स्पष्ट करना चाहते थे और यात्रियों को ये सुनिश्चित करना चाहते थे कि इस नियम का पालन जरूर हो. जिसके तहत ये फैसला किया गया, कि ये नियम आरक्षित कोचों में लागू किया जाएगा. इसके इलावा इस बारे में एक अन्य रेल अधिकारी का कहना है कि सोने के समय में एक घंटे की कटौती केवल इसलिए की गई है, क्यूकि कुछ यात्री ट्रेन में चढ़ने के बाद ही अपनी सीट पर बैठने की बजाय सो जाते थे. अब भले ही दिन हो या रात को, लेकिन उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था. जिसके चलते बाकी यात्रियों को खड़े रह कर सफर करना पड़ता था. इसके साथ ही इससे ऊपर और बीच वाली सीट के यात्रियों को भी काफी परेशानी होती थी.

गौरतलब है कि मंत्रालय के अधिकारियो का कहना है कि इस नए नियम के बाद ट्रैवेलिंग टिकट एग्जामिनर को भी सोने से संबंधित परेशानियों को सुलझाने में काफी आसानी होगी.