क्या आप जानते है फांसी देने से पहले जल्लाद अपराधी के कानों में क्या कहता है?जानकर उड़ जायेंगे आपके होश

इस दुनिया में रहने वाले हर इन्सान को एक न एक दिन तो जाना ही पड़ता है। कहा जाता है की जो अच्छे कर्म करता है वो स्वर्ग में जाता है और बुरे कर्म करने वाले नरक में जाते है। अपराधों को कम करने के लिए अलग अलग देशो में कई तरह के कानून बनाये गए है जिसका अपराध बड़ा होता है उसे फांसी की सजा भी सुने जाती है हमारे देश में देश के खिलाफ विद्रोह करने वाले हर इन्सान और किसी भी बड़ा अपराध करने वाले को हजारों वर्षों से फांसी की सजा सुनाई जाती रही है।

आज तकनीक भले ही कितनी विकसित हो गई हो लेकिन फांसी देने का काम जल्लाद के ही हाथो करवाते है आमतौर पर एक मुजरिम को न्यायालय फांसी की सजा सुनाता है लेकिन वह फांसी जल्लाद के हाथों अंजाम पाती है। कई बार फांसी की सजा पाने वाला इन्सान निर्दोष भी होता है जिसे साजिश के तहत फांसी के फंदे तक पहुंचा दिया जाता है अब ऐसी स्थिति में अगर जल्लाद के हाथों मौत होती है तो यह भी एक अपराधी माना जाता है लेकिन शायद आप नही जानते होंगे कि फांसी देने से पहले जल्लाद मुजरिम से कुछ ऐसी बातें कहता है जिन्हे हर कोई जानना चाहेगा।

हमारे कानून के नियमों के तहत जघन्य अपराधों की सजा में फांसी  देने का प्रावधान है। पहले के जमाने की बात कुछ और थी पर अब गिने चुने मामलों में ही फांसी की सजा दी जाती है। फांसी की सजा पाने वाले अपराधी की हालत क्या होती होगी ये शायद हमसे ज्यादा वो ही जानता होगा कोई इंसान मरना अपने से नहीं चाहता पर कानून अपने नियमों पर काम करता है उसके आगे किसी की नही चलती .फांसी की सजा में मुजरिम के साथ साथ एक और शख्स की भूमिका बड़ी गहरी होती है। वो है जल्लाद जो अपने हाथों से अपराधी को मौत देता है। आज हम आपको फांसी से जुदा एक ऐसा तथ्य के बारे में बताने जा रहे है जो की शायद आप नहीं जानते होंगे।

आपको बता दें की फांसी देने से पहले जल्लाद अपराधी से माफ़ी मांगता है। माफी मांगते हुए कहता है कि आप मुझे माफ कर दें मैं तो बस अपने कर्तव्य का पालन कर रहा हूं। मेरा बस चलता तो मैं आपको नया जीवन देकर आपके सत्य मार्ग पर चलने की कामना करता। अब तो आप समझ ही गए होंगे फांसी देने के काम कितना कठोर होता है और एक जल्लाद भी आखिर एक इंसान ही होता है|

जल्लाद जब किसी अपराधी को फांसी देते हैं तो उससे पहले वो उनसे अपने दिल की बात भी कहते हैं जल्लाद अपराधी से कहता है कि, हिंदू भाइयों को राम-राम मुस्लिमों को सलाम हम क्या कर सकते हैं हम तो हैं हुक्म के गुलाम। इसके बाद जल्लाद अपराधी से माफ़ी भी मांगता है और फिर उसे फांसी दे देता है। साथ ही जल्लाद अपराधी से ये भी कहता है की “अगर उसका बस चलता तो वो मौत देने के बजाये जिंदगी बक्श कर अच्छे रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करता पर क्या करे कानून के नियमों ने मेरे हाथ बांध रखें है।

आपको शायद ये भी नही पता होगा कि भारत में फांसी देने के लिए सिर्फ दो ही जल्लाद हैं और सरकारें इनको हर महीने 3000 रूपये देती हैं और किसी को फांसी दिये जाने पर इनको अलग से पैसे दिये जाते हैं। खासकर आतंकवादियों को फांसी दिये जाने पर इन जल्लादों को मोटी रकम मिलती है|