इस हनुमान जयंती पर गलती से भी न करें ये 3 काम, वरना हो जाएंगे बर्बाद

हम आपको बताने जा रहे हैं आज इस विशेष दिन के बारे में जो कि साल में एक बार आता है इस विशेष दिन को लोग अपनी सारी मनोकामना पूरी कर सकते हैं और साथ ही हनुमान भक्‍त अपने भगवान को प्रसन्‍न कर अपने सारे दूख दर्द दूर कर सकते हैं। बता दें कि आज जहां एक तरफ पुराना व्‍यवसायिक वर्ष खत्‍म हो रहा है वहीं दूसरी ओर आज पूरे देश में हनुमान जयंती मनाया जा रहा है। इस दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा और इसका स्वामी सूर्य माना जाता है जिसकी जानकारी लगभग सभी हिंदूओं को होगी वहीं हम ये भी जानते हैं कि अभी कुछ ही दिन पहले हिन्दी नववर्ष भी शुरू होगा।  ये हर साल चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। वैसे कहा जाता है कि भगवान हनुमान जी की पूजा में बहुत सारे नियमों का पालन होता है और करना भी चाहिए।

वहीं शास्‍त्रों में तो ये भी कहा गया है कि हनुमान जी का जन्म चैत्र माह की पूर्णिमा को हुआ था और इस दिन हनुमान जी को ख़ुश एवं प्रसन्न करने के लिए कई प्रकार के उपाय किए जाते हैं। कहते है इस दिन श्री हनुमानजी का जन्म हुआ है। तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आज के दिन आप ऐसा क्‍या करेंगे कि भगवान हनुमान आपसे प्रसन्‍न हो जाएं।

तो सबसे पहले जानते हैं हनुमान जी की पूजा के नियमों के बारे में

सबसे पहले तो आपको ये जान लेना चाहिए कि हनुमान जयंती के दिन अगर आप व्रत रखते हैं तो इस दिन आप भूलकर भी नमक का सेवन न करें और हो सके तो जो भी वस्‍तु दान दें विशेष रूप से मिठाई तो उस दिन स्‍वयं मीठे का सेवन ना करें।

वहीं अगर आप इस दिन व्रत में हैं तो आपको ध्‍यान रखना चाहिए कि हनुमान जी के व्रत मीठे रखे जाते हैं। इस वजह से इन दिन नमक खाने की मनाही है।

बताया जाता है कि भगवान हनुमान जी की पूजा में काले रंग के कपड़े गलती से भी नहीं पहनने चाहिए। हनुमान जी की पूजा लाल रंग या पीले रंग के कपड़े पहनकर करनी चाहिए।

वहीं आपको बता दें कि हनुमान जी की पूजा में में विशेष तौर पर साफ और शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए। इस दिन अगर भगवान का प्रसाद बना रहे हैं तो नहा धोकर पवित्र मन से काम करना चाहिए। पूजा वाले दिन व्रत करने के साथ साथ ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

अब जानते हैं इस पूजा की विधि

सबसे पहले तो ध्‍यान रहे कि पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके लाल आसन पर बैठें। और फिर उसके बाद लाल धोती और ऊपर वस्त्र चादर, दुपट्टा आदि डाल लें। वहीं ऐसा करने के बाद अपने सामने छोटी चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर तांबे की प्लेट पर लाल फूल का आसन बनाकर हनुमान जी की मूर्ति स्थापित करें।

मूर्ति पर सिंदूर से टीका कर लाल पुष्प अर्पित करें। उसके बाद धूप-दीप, अक्षत, पुष्प एवं नैवेद्य आदि से पूजन करें। सरसों या तिल के तेल का दीप एवं धूप जलाएं। अऔर साथ ही द्वादश नामों का स्मरण 151 बार करें।