मध्यप्रदेश में मिली शिकस्त के बाद भी शिवराज सिंह चौहान को मिलने जा रहा है बड़ा पद,जानकर विरोधियो को लगेगा बड़ा झटका! |

राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम विधानसभा चुनाव के परिणाम आ चुके हैं।मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस  से हार के बाद शिवराज सिंह चौहान अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं|उन्हाेंने कहा कि उनकी पार्टी राज्य में सरकार बनाने का दावा नहीं करेगी. समाचार एजेंसी  के अनुसार शिवराज सिंह चौहान ने कहा है, ‘हमें ज़्यादा वोट मिले हैं. लेकिन सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिल सकीं. इसलिए हम सरकार बनाने का दावा नहीं करेंगे. मैं जल्द ही राज्यपाल से मिलकर उन्हें अपना इस्तीफ़ा सौंप रहा हूं.’साथ ही शिवराज ने नयी सरकार के गठन के पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अब कांग्रेस के कमलनाथ हैं. शिवराज बीजेपी के कद्दावर नेताओं में से एक हैं. इस हार से न तो उनकी लोकप्रियता कम हुई न ही पार्टी में उनका कद. शिवराज की छवि आज भी एक उत्कृष्ट नेता की है. लगातार 13 साल मध्यप्रदेश की कमान संभालने वाले शिवराज का राज भले ही खत्म हो गया है लेकिन प्रदेश की जनता में उन्हें मानने वाले आज भी हैं. प्रदेश के ‘मामा’ शिवराज को चाहने वाले लोगों में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब उनके प्रिय नेता आगे क्या करेंगे.

शिवराज सिंह ने यह विधानसभा चुनाव बुधनी लोकसभा सीट से लड़ा था. जहां से वे जीते भी थे. शिवराज को भारी मात्रा में जनमत प्राप्त हुआ था. उन्हें वोट देने वाले उन्हें एक बार फिर मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे. प्रदेश की करीब 1.56 करोड़ जनता ने इस बार भी सीएम के लिए शिवराज सिंह चौहान को चुना था. शिवराज की हार के बाद उन लोगों का यह ख्वाब तो टूट गया है, लेकिन ये सब लोग चाहते हैं कि शिवराज प्रदेश और देश की राजनीति में सक्रीय रहें.

शिवराज संभाल सकते हैं ये पद

शिवराज के इस्तीफे के बाद अनुमान लगाया जा रहा था कि वे प्रदेश की बजाय केंद्र की राजनीति में सक्रिय होंगे, और आने वाले वक्त में वे केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होकर मध्यप्रदेश में बीजेपी के मिशन-2019 की राह को आसान बनाएं, या फिर लोकसभा चुनाव में उतरकर 2019 के मिशन में अपनी दावेदारी मजबूत करें. लेकिन इन सब बातों से शिवराज साफ तौर पर इनकार कर चुके हैं.

ऐसे में अब शिवराज प्रदेश की राजनीति में ही बीजेपी की कमान संभालकर कांग्रेस को टक्कर देने का काम कर सकते हैं. वे प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष के रूप में बीजेपी का नेतृत्व कर सकते हैं, क्यों कि प्रदेश के बीजेपी नेताओं में शिवराज ही इस समय बड़े नेता हैं. प्रदेश अध्यक्ष के अलावा शिवराज किसी राज्य के राज्यपाल भी बन सकते हैं. केंद्र सरकार उन्हें गवर्नर का पद दे सकती है.

शिवराज के राजनीतिक जीवन की शुरुआत

शिवराज सिंह चौहान के राजनीतिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से होती है.1988 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने. 1990 में पहली बार बीजेपी ने चौहान को बुधनी से विधानसभा चुनाव में खड़ा किया. चौहान ने पूरे इलाक़े की पदयात्रा की थी और पहला ही चुनाव जीतने में सफल रहे. तब चौहान की उम्र महज 31 साल थी.

1991 में 10वीं लोकसभा के लिए आम चुनाव हुए. अटल बिहारी वाजपेयी इस चुनाव में दो जगह से खड़े थे. एक उत्तर प्रदेश के लखनऊ और दूसरा मध्य प्रदेश के विदिशा से.वाजपेयी को दोनों जगह से जीत मिली. उन्होंने सांसदी के लिए लखनऊ को चुना और विदिशा को छोड़ दिया. सुंदरलाल पटवा ने विदिशा के उपचुनाव में शिवराज सिंह चौहान को पार्टी का प्रत्याशी बनाया और वो पहली बार में ही चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंच गए इसके बाद यहां से चौहान 1996, 1998, 1999 और 2004 के भी चुनाव जीते.