बसंत पंचमी विशेष – जाने सरस्वती माँ के पूजन का उचित शुभ मुहूर्त एवं सम्पूर्ण पूजा विधि

मां सरस्वती के आशीर्वाद बिना इंसान ना तो विद्या हासिल कर सकता है और ना ही सफलता की सीढ़ी चढ़ सकता है। जो इनकी सच्चे मन से पूजा करता है वो ही प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता है, ये ज्ञान और कला की देवी बहुत ही मोहक हैं। ये सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा की मानसपुत्री हैं। ये शुक्लवर्ण, श्वेत वस्त्रधारिणी, वीणावादनतत्परा तथा श्वेतपद्मासना कही गई हैं। इनकी उपासना करने से मूर्ख भी विद्वान् बन सकता है। सरस्वती को साहित्य, संगीत, कला की देवी माना जाता है। शिक्षा संस्थाओं में वसंत पंचमी को सरस्वती का जन्म दिन समारोह पूर्वक मनाया जाता है।

इस मौके पर मां सरस्वती की पूजा की जाती है और मौसम में आसानी से उपलब्ध होने वाले फूल चढ़ाए जाते हैं। विद्यार्थी इस दिन किताब-कॉपी और पाठ्य सामग्री की भी पूजा करते हैं। जिस दिन पंचमी तिथि सूर्योदय और दोपहर के बीच रहती है, उस दिन को सरस्वती पूजा के लिये उपयुक्त माना जाता है। इस दिन कई स्थानों पर शिशुओं को पहला अक्षर लिखना सिखाया जाता है। इसका कारण यह है कि इस दिन को विद्या आरंभ करने के लिये शुभ माना जाता है।

बसंत पंचमी- मां सरस्वती पूजा का सटीक शुभ मुहूर्त एवं सरल पूजा विधि

1- बसंत पंचमी तिथि का आरंभ- 9 फरवरी शनिवार को दोपहर 12 बजकर 25 मिनट से हो जायेगा ।
2- मां सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त- 10 फरवरी रविवार को सुबह 7 बजकर 15 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा ।
3- बसंत पंचमी तिथि का समापन 10 फरवरी रविवार को दोपहर 2 बजकर 8 मिनट पर हो जायेगा ।

ऐसे करें मां सरस्वती की पूजा

1- माघ माह की पंचमी तिथि को मां सरस्वती की विशेष पूजा की जाती है ।
2- पूजा में सफ़ेद कमल पर बैठी वीणाधारिणी मां सरस्वती का स्वरूप सर्वोत्तम माना जाता है ।
3- सफ़ेद अथवा पीले वस्त्र धारण करके इनकी पूजा करनी चाहिए और पूजा का आसन भी पीला हो तो सर्वोत्तम माना जाता है ।
4- पूजा में सफ़ेद अथवा पीले फूल तथा हलवा या मेवा का भोग लगाना चाहिए ।
5- स्फटिक की माला से इस मंत्र- ॐ ऐं नमः या फिर ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः मन्त्र का 108 बार जप करने से सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं ।
6- बसंत पंचमी के दिन पूरी श्रद्धा भावना से व्रत रखकर प्रातः सरस्वती वंदना का पाठ भी करना चाहिए ।

ज्ञान और आत्मिक शांति:-

देवी सरस्वती ज्ञान और आत्मिक शांति की प्रतीक हैं। इनकी प्रसन्नता के लिए पूजा में सफेद और पीले रंग के फूलों और वस्त्रों का प्रयोग करना चाहिए। देवी सरस्वती को प्रसाद स्वरूप बूंदी, बेर, चूरमा, चावल का खीर भोग लगाना चाहिए। इस दिन से बसंत का आगमन हो जाता है इसलिए देवी को गुलाब अर्पित करना चाहिए और गुलाल से एक-दूसरे को टीका लगाना चाहिए।

पीले रंग का है खास महत्व :

बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का खास महत्व है। दरअसल, वसंत ऋतु में सरसों की फसल की वजह से धरती पीली नजर आती है। इसे ध्यान में रखकर इस दिन लोग पीले रंग के कपड़े पहनकर बसंत पंचमी का स्वागत करते हैं। इस द‍िन सूर्य उत्तरायण होता है, जो यह संदेश देता है कि हमें सूर्य की तरह गंभीर और प्रखर बनना चाहिए। बसंत पंचमी के दिन सिर्फ कपड़े ही नहीं बल्कि खाने में भी पीले रंग की चीजें बनायी जाती हैं।