पहले सास के पैर छू निभाया बहू होने का फ़र्ज़, फिर एसएसपी बन संभाली पुरे इंदौर जिले के पुलिस की कमॉन

दोस्तों आजकल महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. वो दिन गए जब महिलाओं और पुरुषों की शक्ति को अलग अलग आका जाता था. आज के जमाने में महिलाएं भी वे सारी चीजें करने में समर्थ हैं जो एक पुरुष कर सकता हैं. इसी कड़ी में आज हम आपको एक ऐसी महिला से मिलाने जा रहे हैं जो हाल ही में मध्यप्रदेश के इंदौर शहर की पहली ऐसी महिला एसएसपी बनी हैं जिसे प्रशासन ने पुरे इंदौर जिले की पुलिस की कमान हाथ में सौपी हैं. ये महिला और कोई नहीं बल्कि साल 2006 की आईपीएस बैच की टॉपर रह चुकी रूचि वर्धन मिश्र हैं. रूचि ने बीते मंगलवार इंदौर पुलिस की कमान को संभाला हैं.

जिस दिन रूचि ने इस पोस्ट को संभाला हैं उस दिन वे अपनी पति शशांक जो कि एक कलेक्टर भी हैं, के साथ डीआईजी कार्यालय आई. इस दौरान उनके साथ उनका बेटा और सास भी मौजूद थी. इतने बड़े पद पर होने के बावजूद रूचि अपने संस्कार नहीं भूली और उन्होंने इस कुर्सी पर बैठने से पहले सास के पैर छुए. इस दौरान रूचि ने मीडिया से भी बातचीत की. रूचि ने बताया की इंदौर शहर में अपराध पर लगाम लगाए रखना और यहाँ की कानूनी व्यवस्था को बनाए रखना इतना आसान भी नहीं हैं लेकिन वो अपनी पूरी कोशिश और लगन के साथ यहाँ काम करेगी और शहर में शान्ति और अमन कायम रखेगी.

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि रूचि मुख्य रूप से सतना शहर की रहने वाली हैं. इसके पहले वे होशंगाबाद में एसपी और भोपाल, राजगढ़ में एएसपी के पद पर कार्यरत थी. आपको जान हैरानी होगी कि रूचि आईएएस और आईपीएस दोनों के लिए सिलेक्ट हो गई थी. ऐसे में उन्होंने आईपीएस बनना चुना क्योंकि वो इसे ज्यादा चेलेंजिंग जॉब समझती हैं. रूचि को बचपन से ही कुछ अलग कर गुजरने का जोश सवार था. उनका देशभक्ति की ओर ख़ासा रुझान था. इसलिए वो इस फिल्ड में कुछ करना चाहती थी.

एक बेहतरीन एसएसपी होने के अलावा रूचि शानदार निशानेबाज़ भी हैं. उन्होंने शूटिंग कॉम्पिटिशन 10 में से 10 नम्बर लाकर सबको हैरान कर दिया था. इसके लिए उन्हा प्रथम पुरुष्कार भी मिला. एजुकेशन की बात करे तो उन्होंने दिल्ली की जेएनयू यूनिवर्सिटी में एमए और एमफील कर रखा हैं. इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की एग्जाम दी जिसमे उनकी ऑल इंडिया रैंक 67 आई.

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि रूचि जब भोपाल में थी तो उन्होंने वहां दो गैंग रैप केस में शामिल सभी 12 अपराधियों को ना सिर्फ जेल की सलाखों में बंद करवाया था बल्कि उन्हें आजीवन कारावास की सजा भी दिलवाई थी. इनमे से एक मामला 2016 में यूपीएससी की छात्रा से सामूहिक बलात्कार का था तो जबकि दूसरा मामला 13 साल की बच्ची का भोपाल रेल्वे स्टेशन पर हुआ गैंग रेप का था. इन दोनों ही मामलो में अपराधियों को सजा दिलाने में रूचि ने काफी अहम भूमिका अदा की थी.

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