ब्रह्म कमल: इस दुर्लभ फूल से टपकती हैं अमृत की बूंदें, देखने मात्र से होती है हर मनोकामना पूर्ण

प्रकृत्ति से जुड़ी हर चीज बहुत खूबसूरत है, चाहे वो नदियां हों या तालाब, फूल हों या पेड़-पौधे, ये सभी ना सिर्फ आकर्षक हैं बल्कि कई ऐसे गुणों से लैस भी हैं जो मानव हित के काम आते हैं। इनमें से कुछ तो पूरी तरह दैवीय शक्ति वाले माने जाते हैं। उदाहरण स्वरूप वृक्षों में पीपल और बरगद के पेड़ को ईश्वरीय शक्ति का प्रतीक माना गया है, नदियों में तो लगभग सभी पवित्र नदियां दैवीय अस्तित्व रखती हैं वहीं अगर फूलों की बात करें तो एक फूल ऐसा है जिसेके विषय में भले ही कम लोग जानते हों लेकिन यह इसकी अलौकिक शक्ति को कम नहीं करता।

ब्रह्म कमल

ब्रह्म कमल, इसे स्वयं सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी का पुष्प माना जाता है। हिमालय की ऊंचाइयों पर मिलने वाला यह पुष्प अपना पौराणिक महत्व भी रखता है। इस फूल के विषय में यह माना जाता है कि मनुष्य की इच्छाओं को पूर्ण करता है। यह कमल सफेद रंग का होता है जो देखने में वाकई आकर्षक है, इसका उल्लेख कई पौराणिक कहानियों में भी मिलता है।

 

पौराणिक मान्यताएं

ब्रह्म कमल से जुड़ी बहुत सी पौराणिक मान्यताएं हैं, जिनमें से एक के अनुसार जिस कमल पर सृष्टि के रचयिता स्वयं ब्रह्मा विराजमान हैं वही ब्रह्म कमल है, इसी में से कि सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई थी।माना जाता है धरती पर ब्रहा कमल एक ऐसा फूल है जिसकी पंखुड़ियों से अमृत की बूंदे टपकती हैं। यह फूल ज्यादातर उत्तराखंड की वादियों में देखा जाता है. ब्रहा कमल हर समय नहीं बल्कि जुलाई-अगस्त के समय में ही आपको खिलता हुआ नजर आ सकता है. उत्तराखंड के अलावा आप इसे हिमालय, उत्तरी बर्मा और दक्षिण-पश्चिम चीन में भी आप देख सकते हैं|

इस दिव्य चमत्कारी फूल को खासकर उत्तराखंड के मशहूर केदारनाथ और बद्रीनाथ के मंदिरों में भगवान के चरणों में अर्पित किया जाता है.कहा जाता है कि पहाड़ी क्षेत्र में ह 11 हजार से 17 हजार फुट की ऊंचाइयों पर बर्फ की चट्टानों पर आपको यह फूल खिलते हुए दिखाई दे सकते हैं, इसके खिलने का समय दिन में नहीं बल्कि रात को होता है.मान्यता है कि इसे जो भी कोई खिलते हुए देखता है वह बहुत ही भाग्यशाली माना जाता है.

फूल से टपकती अमृत की बूंदें, खत्म हो जाते हैं यह रोग

हिमालय के मंदिरो में इस चमत्कारी व दिव्य फूल को चढाने की परंपरा है . आंधी रात को इन फूलों के खिलते ही वहां के निवासी इन्हें बौरे में भरकर ले आते हैं और 10,20 रुपये में मंदिर के पास ले जाकर लोगों को बेच देते हैं.बता दें कि इसको सिर्फ पूजा में ही नहीं बल्कि दवाई के रुप में भी इस्तेमाल किया जाता है.इस फूल से काली खांसी से लेकर कैंसर जैसी खतरनाक बिमारी को खत्म किया जा सकता है|वैघ के अनुसार इसकी पंखुड़ियों से टपका हुआ जल अमृत के समान माना जाता है . इस फूल के अर्क को यदि बीमार व्यक्ति को दिया जाएं तो इससे उसका बुखार जल्द ठीक हो जाता है. यदि किसी के लीवर में इन्फेक्शन हो तो उस व्यक्ति को इसका इस्तेमाल जरुर करना चाहिए.

इच्छा पूर्ति वाला कमल

इस कमल से संबंधित एक बहुत प्रचलित मान्यता कहती है कि जो भी व्यक्ति इस फूल को देख लेता है, उसकी हर इच्छा पूर्ण होती है। इसे खिलते हुए देखना भी आसान नहीं है क्योंकि यह देर रात में खिलता है और केवल कुछ ही घंटों तक रहता है। यह फूल 14 साल में एक बार ही खिलता है, जिस कारण इसके दर्शन अत्यंत दुर्लभ है।