पीरियड्स के दौरान मासूम बच्चियों और महिलाओ की मौत है मंजूर, पर घर में प्रवेश करना माना जाता है अपवित्र !

यूँ तो पुराने समय से ही महिलाओ पर बहुत से अत्याचार होते आये है, पर आज हम आपको महिलाओ के विरुद्ध चल रही एक ऐसी प्रथा के बारे बताना चाहते है, जिसके बारे में जान कर आप भी हैरान रह जाएंगे. बता दे कि ये प्रथा नेपाल की छाउपड़ी प्रथा कहलाती है. गौरतलब है, कि इस जगह माहवारी के समय महिलाओ के साथ इतना गन्दा सलूक किया जाता है, कि कोई सोच भी नहीं सकता. बता दे कि नेपाल का सबसे ठंडा इलाका सिमिकोट हमेशा बर्फ से ढका रहता है और इस जगह पर भी महिलाओ को माहवारी के दौरान अपवित्र माना जाता है.

केवल इतना ही नहीं इसके इलावा पीरियड्स के दौरान यहाँ महिलाओ का एक तरह से बहिष्कार ही कर दिया जाता है और उन्हें घर में रहने तक नहीं दिया जाता. दरअसल यहाँ के लोगो का कहना है, कि यदि वो ऐसा नहीं करेंगे तो उनके देवी देवता उनसे नाराज हो जाएंगे. बता दे कि जिस सप्ताह से महिलाओ की माहवारी के दिन शुरू होते है, तब से एक हफ्ते तक वो घर से बाहर ठंड में ही रहती है. गौरतलब है, कि इस दौरान महिलाएं घर के बाहर गोठ में रहती है, जहाँ जानवरो को रखा जाता है.

बरहलाल ये जगह महिलाओ और बच्चियों के लिए वैसे ही सुरक्षित नहीं होती, क्यूकि यहाँ उनके साथ बलात्कार होने का खतरा भी रहता है. वैसे आपको बता दे कि ये नियम केवल माहवारी वाली महिलाओ पर ही लागू नहीं होता, बल्कि जो महिलाएं माँ बनने वाली होती है, उन पर भी लागू होता है. बता दे कि इसी गोठ में बच्चे को जन्म दिया जाता है और माँ तथा बच्चा एक महीने तक वही रहते है. वो इसलिए क्यूकि इस दौरान माँ अपवित्र कहलायी जाती है. आपको जान कर हैरानी होगी कि इस प्रथा के चलते हर साल दो तीन माताएं तो अपनी जान गवा ही देती है. वैसे ये कहना गलत नहीं होगा कि माँ बनने जैसे खूबसूरत पल के दौरान भी ये महिलाएं जीवन का नर्क भोगती है.

हालांकि इस प्रथा की क्रूरता को देखते हुए 2005 में नेपाल सरकार ने इस पर रोक लगा दी थी, पर फिर भी लोग इस प्रथा को आज भी मानते है और आज भी महिलाओ के साथ ऐसा व्यव्हार करते है. बता दे कि पिछले महीने ही इस प्रथा के चलते दो बच्चियों की मौत हो गई थी. इसमें से एक बच्ची को तो सांप ने काट लिया था और दूसरी बच्ची का दम गोठ में घुट गया. ऐसे में नेपाल सरकार ने ये एलान कर दिया कि इस प्रथा को अब क़ानूनी तौर पर अपराध माना जाएगा.

इसके इलावा यह नियम बनाया गया कि यदि कोई महिलाओ के साथ माहवारी के दौरान दुर्व्यवहार करता पकड़ा गया तो तीन महीने की जेल होगी और साथ ही तीन हजार नेपाली रूपये जुर्माने के तौर पर देने होंगे. यानि अब वहां की महिलाएं अपने साथ हो रहे दुर्व्यवहार के चलते पुलिस में शिकायत दर्ज करवा सकती है. हालांकि कानून बनने के बाद सबसे पहला सवाल यही उठता है, कि क्या घर की महिलाएं या बच्चिया घरवालों के खिलाफ जाकर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाएंगी. और अगर ऐसा हो भी गया तो क्या ये समाज बदल जाएगा. जी नहीं ये दकियानूसी प्रथाएं उन प्रथाओं में से एक है, जो शायद कभी दम नहीं तोड़ सकती और इन्हे कानून का भी कोई डर नहीं होता.

दरअसल कुछ लोगो का ये मानना है कि भले ही प्रथा के कारण मासूम महिलाएं और बच्चियां अपनी जान ही क्यों न गवा दे, पर हम अपनी प्रथा नहीं छोड़ेगे.