जज्बे को सलाम : पति की शहादत के बाद पत्नी ने कड़ी मेहनत की, किया एग्जाम टॉप ,अब होंगी सेना में भर्ती

“तू शक्ति का रूप है, नारी तेरा नाम। अब ना तुझको रुकना है, ना करना है आराम। दिल मे तेरे जो भी है, उसको दे अंजाम।“ये पंक्तियां एक शहीद की पत्नी पर बिलकुल फिट बैठती हैं जिसने अपने पति के शहीद होने के बाद हिम्मत नहीं हारी बल्कि देश की रक्षा करने का फैसला किया।जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में शहीद जवानों की शहादत ने देश को झकझोर दिया है। सालों से हमारे देश के होनहार अफसर और जवान आतंकवाद से लड़ते हुए शहीद होते आ रहे हैं। शहीदो की शहादत पर परिजनों को गर्व तो होता है, लेकिन जवान अपने पीछे जो खालीपन और पीड़ा छोड़ जाते हैं, वो परिजनों को तोड़कर रख देता है।

शहीद मेजर प्रसाद महादिक की पत्नी भी इस दर्द और पीड़ा से टूट सकती थीं, लेकिन उन्होंने इस दर्द को ही अपना हौसला बना लिया। पति को श्रद्धांजलि देने के लिए शहीद मेजर प्रसाद महादिक की पत्नी गौरी महादिक भारतीय सेना में शामिल होना चाहती हैं।उनका मानना है कि पति को श्रद्धांजलि देने का यही सबसे बेहतर और सच्चा तरीका है, कि वो भी देश की सेवा करें।गौरी महादिक एक योग्य कंपनी सचिव और वकील हैं। वह मई 2017 से एक प्रतिष्ठित कानूनी फर्म के साथ काम कर रही हैं। गौरी ने इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स के साथ भी काम किया है। अब वो आर्मी ज्वाइन करना चाहती हैं।

गौरी कहती हैं कि पति के शहीद होने के 10 दिन बाद मैं सोच रही थी, कि अब मुझे क्या करना चाहिए….कई सवाल मन में थे, जिनके जवाब मुझे ढूंढने थे। फिर मैंने फैसला किया कि मुझे उनके लिए कुछ करना है, और मैं सेना में शामिल हो जाऊंगी। मैं पति की वर्दी और उनके स्टार को पहनूंगी।दिसंबर 2017 में गौरी और मेजर प्रसाद की शादी को दो साल हो गए थे. जब वो देश के लिए शहीद हुए. मेजर महादिक भारतीय सेना की बिहार रेजिमेंट में अधिकारी थे. उनकी पोस्टिंग भारत-चीन बॉर्डर के पास तवांग में हुई थी|30 दिसंबर 2017 को उनके बैरक पर उग्रवादियों की गोलीबारी शुरू हो गई, जिसमें वो शहीद गए. गौरी महादिक ने बताया कि पति की शहादत के 10 दिन के बाद ही उन्होंने आर्मी में जाने का ठान लिया था.

गौरी महादिक अब चैन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में ट्रेनिंग लेंगी. फिर अगले साल वो आर्मी में लेफ्टिनेंट के पद पर जॉइन करेंगी. गौरी ने ये भी बताया कि ये एक संयोग ही है कि उनकी ट्रेनिंग वहीं होगी, जहां उनके पति की ट्रेनिंग हुई थी. उन्होंने फेसबुक पर भी एक पोस्ट डाला, जिसमें उन्होंने लिखा कि संयोगवश उन्हें भी वहीं चेस्ट नंबर 28 मिला जो उनके पति को मिला था|अब कंपनी सेक्रेटरी का जॉब छोड़कर गौरी सेना में जाने के  लिए तैयार हैं. सभी कड़े ट्रेनिंग प्रोसेस से गुज़रने के लिए तैयार है. देश की सेवा करने के लिए तैयार है. हम गौरी महादिक के जज़्बे को सलाम करते हैं.

अपने पति के शहीद होने के बाद गौरी ने जिस तरह से खुद को संभाला और हिम्मत दिखाई वो सराहनीय है। वास्तव में गौरी जैसी महिलाएं देश में महिला सशक्तिकरण का एक नया उदाहरण स्थापित कर रही हैं। ये महिलाएं देश के अन्य महिलाओं के लिए मिसाल कायम कर रही हैं।