भारतीय पायलट को पकड़ने का दावा कर रहा पाक,जाने जंग में बंदी बनाए लोगो के साथ क्या होता हैं?

आज बुधवार सुबह पाकिस्तान के लड़ाकू विमान भारत की सीमा लांघ अंदर घुस आए थे. लेकिन जैसे ही हमारी वायुसेना को इस घुसपैठ के बारे में पता चला तो उन्होंने जवाबी कारवाई करते हुए पाकिस्तानी लड़ाकू विमान को गिरा दिया. लेकिन इस दौरान एक अन्य पाकिस्तानी फाइटर प्लेन ने इंडियन विमान पर हमला किया. इसके बाद पकिस्तान की तरफ से ये दावा किया जा रहा हैं कि भारतीय वायुसेना का एक पायलट उनके कब्जे में हैं. वहीँ दूसरी और भारत ने भी आज अपना एक पायलट मिसिंग होने की बात स्वीकारी हैं.

बताते चले कि विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रवीश कुमार ने आज एक छोटी सी प्रेस कांफ्रेंस रखी थी. 1 मिनट 38 सेकंड की इस प्रेस कांफ्रेंस में रविश कुमार ने बताया कि उन्हें विश्वशनीय सूत्रों से जानकारी मिली थी कि जैश अपने कैंप में भारत पर खतरनाक कई अटैक करने की योजना बना रहा हैं. ऐसे में उन्होंने 26 फरवरी को एयरस्ट्राइक की थी. इसके बाद आज (27 फरवरी) पाकिस्तान एयरफ़ोर्स भारतीय सीमा के अंदर घुशपैठ करती हुई पाई गई. इस घुसपैठ को इंडियन एयरफ्रोस के रेडार ने ट्रेस कर लिया और पकिस्तान के लड़ाकू विमान पर भारतीय मिग 21 बिसन से हमला हुआ जिसमे पकिस्तान का विमान नीचे गिरता हुआ पकिस्तान जमीन पर चला गया. हालाँकि इस कारवाई में उनका मिग 21 बिसन प्लेन भी क्रेश हो गया. साथ ही उनका एक पायलट अभी मिस हैं. पकिस्तान ये दावा कर रहा हैं कि उन्हके पास भारत का एक पायलट हैं. हम इस मामले में उनके फैक्ट्स का इंतज़ार कर रहे हैं.

युद्ध में गिरफ्तार लोगो के साथ क्या होता हैं?

दोस्तों इस घटना के बीच हर कोई यह सोच रहा हैं कि यदि पकिस्तान का भारतीय पायलट को बंधक बनाने का दावा सच हैं तो अब उसके साथ क्या होगा? ऐसे में आज हम आपको बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय लेवल पर युद्ध बंदियों को लेकर क्या नियम हैं. दरअसल अंतरराष्ट्रीय जिनेवा संधि के दौरान युद्धबंदियों को लेकर कुछ नियम बनाए गए थे. इस नियम के तहत युद्ध में बंदी बनाए गए लोगो को डराने, धमकाने या उनका अपमान करने जैसे काम नहीं किए जा सकते हैं. साथ ही आप युद्ध बंदियों के आधार पर देश की जनता में कोई उत्सुकता या जोश भी नहीं पैदा कर सकते हैं. जिनेवा संधि के अनुसार युद्ध में बंदी बनाए गए लोगो के ऊपर आप या तो मुकदमा चला सकते हैं या फिर युद्ध समाप्त होने पर उन्हें लौटा सकते हैं. वहीँ पकड़े जाने वाले युद्ध बंदी को अपना नाम, सैन्य पद और नंबर बताना अनिवार्य होगा.

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इस जिनेवा संधि को द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद 1949 में बनाया गया था. इसका उद्देश्य इंसानी मूल्यों को बनाए रखना था. लेकिन कभी कभी कुछ देश इस नियम का उलंघन करते हुए भी देखे गए हैं. ऐसे में ये देखना होगा कि यदि पाकिस्तान के कब्जे में सच में कोई भारतीय पायलट हैं तो वो उसके साथ इस नियम का पालन करता हैं या नहीं.

बता दे कि पाकिस्तान और भारत के बीच फिलहाल हालात बहुत खतरनाक और तनावपूर्ण हैं. दोनों देशो के बीच युद्ध जैसा माहोल बना हुआ हैं.