कारगिल : यह भारतीय पायलट भी कभी था पाक के कब्जे में, पूरे 8 दिन के बाद ऐसे हुई थी वापसी

भारत और पाकिस्तान के बीच जारी मौजूदा तनाव के बीच पाकिस्तान ने दावा किया है कि उन्होंने आत्मरक्षा में भारत के दो लड़ाकू विमान मार गिराए हैं. पाकिस्तान के मेजर जनरल आसिफ गफूर ने प्रेस से बात करते हुए कहा, ‘हमने अपनी क्षमता दिखाने के लिए 6 सुनसान जगहों पर टारगेट लॉक किए थे. लेकिन उसी वक्त भारत के दो लड़ाकू विमान लाइन ऑफ कंट्रोल के पार करके दाखिल हो रहे थे. हमने उन्हें मार गिराया. इसमें दो भारतीय पायलट को गिरफ्तार किया गया है.’

इसके साथ ही पाकिस्तान ने कथित रूप से गिरफ्तार इंडियन पायलट का वीडियो जारी किया है जिसमें वो अपना नाम विंग कमांडर अभिनंदन कुमार बता रहे हैं. हालांकि भारत की तरफ से इसकी कोई पुष्टि नहीं की गई है|गौरतलब है की आज से 20 साल पहले कारगिल युद्ध के समय पाकिस्तान ने एक भारतीय पायलट को गिरफ्तार करने से सफलता हांसिल की थी और इस भारतीय फाइटर  पायलट का नाम है नचिकेता |आज हम आपको फाइटर पायलट नचिकेता की बेहद ही दिलचस्प कहानी बताने जा रहे है की किस तरह से वे दुश्मनों के चंगुल से सकुशल लौटे थे |

फ्लाइट लेफ्टिनेंट कम्बम्पति नचिकेता उन कुछ फाइटर पायलट्स में से एक हैं, जो दुश्मन के इलाके में फंसने के बावजूद वापस लौटे। 28 मई, 1999 को पाकिस्तानी सेना द्वारा उनका विमान क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। पाकिस्तानी सेना ने उन्हें एक हफ्ते तक कैद में रखा। बाद में 4 जून, 1999 को अंतराष्ट्रीय मीडिया के दबाव के कारण उन्हें रिहा किया गया।

सन 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान, 26 वर्षीय कम्बम्पति नचिकेता भारतीय वायुसेना में 9 नंबर दस्ते में सेवा अधिकारी थे। उनका काम था, लगभग 17,000 फीट की ऊंचाई से खतरनाक मिसाइलें दुश्मन पर दागना।27 मई 1999 के दिन, नचिकेता अपने मिग-27 विमान से दुश्मनों के ठिकानों पर हमला कर रहे थे। उन्होंने जैसे ही एक ठिकाने को निशाना बनाकर उसपर 30 एमएम की एक मिसाइल चलाई, उनके मिग-27 विमान का इंजन बंद हो गया। इंजन से चिंगारी और धुआं निकलने लगा।

एक प्रशिक्षित पायलट की तरह उन्होंने हवा में ही विमान के इंजन को फिर से चालू करने की कई कोशिश की, लेकिन इंजन शुरू नहीं हुआ। अंततः नचिकेता को अपने विमान से बाहर निकलना पड़ा। पहाड़ पर उतरने के बाद नचिकेता को आसमान में एक सूक्ष्म बिंदु दिखाई दिया। वह बिंदु उनके साथी पायलट और दल के लीडर अजय आहूजा का मिग-21 विमान था जो की अपने साथी पायलट की खोज में आसमान में मंडरा रहा था। नचिकेता को ज़ोरदार धक्का लगा जब उन्होंने देखा की वो सूक्ष्म बिंदु अचानक ही एक भयानक आग के गोले में बदल गया और आसमान में एक ज़ोरदार धमाका हुआ। एक पाकिस्तानी अंज़ा मिसाइल ने अजय आहूजा के विमान को अपना निशाना बना लिया था।

हादसे के आधे घंटे बाद ही घात लगाए पाकिस्तानी सैनिकों ने नचिकेता पर हमला कर दिया। बहादुर नचिकेता ने भी अपनी वीरता का परिचय देते हुए उनसे डटकर मुकाबला किया। गोलाबारूद ख़त्म हो जाने के बाद नचिकेता को पाकिस्तानी सेना ने पकड़ लिया और उन्हें रावलपिंडी की कालकोठरी में बंद कर दिया गया। जानकारी लेने के इरादे से पाकिस्तानी सेना ने उन्हें बहुत यातनाएं दी।

नचिकेता ने अपने एक साक्षात्कार में कहा थाः

“वे मुझे पीट-पीट कर मार डालना चाहते थे, क्योंकि उनके लिए मैं सिर्फ एक दुश्मन पायलट था जिसने हवा से उन पर मिसाइलें चलाईं थीं। भाग्यवश, एक वरिष्ठ अधिकारी वहां आया। वह वरिष्ठ था। उसने स्थिति को समझा कि मैं एक युद्धबंदी हूं और मेरे साथ इस तरह का व्यव्हार नहीं होना चाहिए। एक उम्मीद ज़रूर थी की एक दिन मैं ज़रूर वापस आऊंगा।”

नचिकेता 3 जून, 1999 तक युद्धबंदी रहे। बाद में संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के दबाव के कारण उन्हें पाकिस्तान में इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेड क्रॉस को सौंप दिया गया। भारत वापस आने पर जब वह  वाघा बॉर्डर पर मीडिया से मिले तो उन्होंने कहा की वह सिर्फ एक सैनिक हैं, कोई हीरो नहीं और वह अपनी अगली उड़ान भरने के लिए बिलकुल तैयार हैं।हालांकि, मिग-27 विमान से निकलते समय रीढ़ की हड्डी में चोट लगाने के कारण वह दोबारा लड़ाकू विमान तो नहीं उड़ा सके। बाद में दोबारा प्रशिक्षण लेकर वह भारतीय वायुसेना के परिवहन बड़े में शामिल हुए।