आखिरी दिनों में इस एक्टर को याद करते करते कादर खान ने तोड़ा दम, बेटे ने बताई दर्द भरी दास्तां

बॉलिवुड के दिग्गज ऐक्टर और पॉप्युलर स्क्रीनराइटर कादर खान अब इस दुनिया में नहीं हैं। नए साल के आगाज से पहले ही यानी 31 दिसंबर को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। फिल्मों से दूर होने के बाद कादर खान एकदम अकेले पड़ गए थे। उनके पास परिवार का साथ तो था, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री ने तो जैसे उनसे नाता ही तोड़ लिया था।कादर खान के बेटे सरफराज ने अभी हाल ही में दिए इंटरव्यू में कहा कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री और उसके लोगों ने कभी उनके पिता की सुध नहीं ली और न ही उनकी सेहत के बारे में कभी पूछा। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोग उनके बेहद करीबी थे।

उन्हीं में से एक रहे अमिताभ बच्चन।भले ही अमिताभ बच्चन और कादर खान के रिश्तों में काफी उतार-चढ़ाव रहा, लेकिन सरफराज की मानें तो उनके पिता अपने आखिरी दिनों में भी अमिताभ बच्चन को ही याद करते रहे।सरफराज ने कहा कि वह जब भी अपने पिता से पूछते वह फिल्म इंडस्ट्री में से किसे सबसे ज़्यादा याद करते हैं तो वह बच्चन साहब का नाम लेते। बकौल सरफराज, ‘मैं जानता हूं कि यह प्यार दोनों तरफ से था और है। मैं चाहता हूं कि बच्चन साहब जानें कि मेरे पापा आखिरी दम तक उनके बारे में ही बात करते रहे।’

गौरतलब है कि जब कुछ वक्त पहले बिग बी को कादर खान की बिगड़ती सेहत के बारे में पता चला था तो उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी चिंता जाहिर की थी और जब कादर खान का निधन हुआ तो उन्होंने ट्वीट करके अपना शोक व्यक्त किया था।हालांकि एक वक्त था जब अमिताभ बच्चन को ‘अमित जी’ न कहने के चक्कर में कादर खान को उनकी कई फिल्मों से हटा दिया गया था। इसका जिक्र कादर खान ने सालों पहले दिए एक इंटरव्यू में भी किया था और उसका एक विडियो हाल ही में सामने आया है।

बताते चले  अमिताभ बच्चन ने बॉलीवुड एक्टर कादर खान को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, ‘”कादर खान प्रतिभा के धनी और फिल्मों के लिए समर्पित कलाकार थे। वे गजब के लेखक थे। मेरी ज्यादातर कामयाब फिल्में उन्हीं ने लिखीं। वे मेरे अजीज दोस्त रहे। वे गणितज्ञ भी थे।” अमिताभ और कादर ने ‘दो और दो पांच’, ‘अदालत’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘मिस्टर नटवरलाल’, ‘सुहाग’, ‘कुली’, ‘कालिया’, ‘शहंशाह’ और ‘हम’ समेत 21 फिल्मों में साथ बतौर अभिनेता या डायलॉग-स्क्रिप्ट राइटर काम किया था।कादर खान ने अपने आखिरी दिन कनाडा में अपनी फैमिली के साथ बिताए।

सरफराज के अनुसार, बीमारी ने उनके पिता की हालत ऐसी कर दी थी कि उनमें कुछ भी करने की इच्छा खत्म हो गई थी, लेकिन आखिरी सांस निकलने के बाद भी उनके चेहरे पर सिर्फ मुस्कराहट थी।कादर खान का जन्म 22 अक्टूबर, 1937 को काबुल में हुआ। स्क्रिप्ट राइटिंग शुरू करने से पहले वे मुंबई के एमएच साबू सिद्दीक इंजीनियरिंग कॉलेज में सिविल इंजीनियरिंग के लेक्चरर थे। उन्होंने 1973 में ‘दाग’ फिल्म से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की।  कादर खान ने करीब 300 फिल्मों में काम किया। इसके साथ ही करीब हिंदी और उर्दू में 250 फिल्मों के डायलॉग भी लिखे। यहां तक कि राजेश खन्ना और मुमताज की साल 1974 में आई फिल्म ‘रोटी’ के लिए कादर ने ही डायलॉग लिखे थे। इस काम के लिए कादर खान को 1 लाख 21 हजार रुपए दिए गए थे।

कादर खान आखिरी बार साल 2015 में आई फिल्म ‘दिमाग का दही’ में नजर आए थे। साल 2013 में कादर को फिल्मों में योगदान के लिए साहित्य शिरोमनी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था