18 अप्रैल अक्षय तृतीया के दिन है बड़ा बुधवार, एक रुपए का दान बना देगा धनवान

हमारे भारत में कई पर्व मनाये जाते है और सबका अपना अपना अलग महत्व होता है बैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि में पूरे भारत वर्ष में बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। यह त्योहार प्रमुखता से हिन्दू और जैन धर्म के लोगो का त्यौहार हैं। इस वर्ष 18 अप्रैल-2018 को अक्षय तृतीया पड़ रही है सर्व सिद्ध मुहूर्त के रुप में भी अक्षय तृतीया का बहुत अधिक महत्व है। माना जाता है इस दिन आप हर प्रकार के मांगलिक कार्य जैसे विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, वस्त्र आभूषण आदि की खरीदारी, जमीन या वाहन खरीदना आदि को कर सकते हैं।

हमारे पुराणों में इस दिन पितरों का तर्पण, पिंडदान या अन्य किसी भी तरह का दान अक्षय फल प्रदान करता है। इस दिन गंगा में स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इतना ही नहीं इस दिन किए जाने वाला जप, तप, हवन, दान और पुण्य कार्य भी अक्षय हो जाते हैं। कहा जाता है की आज ही के दिन कई महापुरुषों का जन्म भी हुआ था। अक्षय तृतीया पर्व को कई नामों से जाना जाता है।

इसे अखतीज और वैशाख तीज भी कहा जाता है। इस पर्व को भारतवर्ष के खास त्योहारों की श्रेणी में रखा जाता है। इस दिन स्नान, दान, जप, होम आदि अपने सामर्थ्य के अनुसार जितना भी किया जाए, वह बहुत ही शुभ होता है।अक्षय तृतीया कई मायनों से बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता है। जिनके काम नहीं बन पाते हैं, या व्यापार में लगातार घाटा हो रहा है अथवा किसी कार्य के लिए कोई शुभ मुहुर्त नहीं मिल पा रहा हो तो उनके लिए यह दिन अति शुभ है।

कोई भी नई शुरुआत करने के लिए अक्षय तृतीया का दिन बड़ा मंगलमयी माना जाता है। अक्षय तृतीया में सोना खरीदना बहुत शुभ माना गया है। इस दिन स्वर्णादि आभूषणों की ख़रीद-फरोख्त को भाग्य की शुभता से जोड़ा जाता है।अक्षय तृतीया पर पितरों को किया गया तर्पण और पिंडदान अथवा अपने सामर्थ्य के अनुरूप किसी भी तरह का दान अक्षय फल प्रदान करता है। इस दिन लोग श्रद्धा से गंगा स्नान भी करते हैं और भगवत पूजन करते हैं ताकि जीवन के कष्टों से मुक्ति पा सकें।

एक पौराणिक मान्यता के अनुसार त्रेता युग की शुरुआत भी इसी दिन से हुई थी। इसी कारण से यह तिथि युग तिथि के नाम से भी जानते है। इसी दिन प्रसिद्ध तीर्थस्थल बद्रीनारायण के कपाट भी खुलते हैं।अक्षय तृतीया के दिन गर्मी की ऋतु में खाने-पीने, पहनने आदि के काम आने वाली और गर्मी को शान्त करने वाली सभी वस्तुओं का दान करना बहुत ही शुभ होता है। इसके अतिरिक्त इस दिन जौ, गेहूं, चने, दही, चावल, खिचडी, ईश का रस, ठण्डाई व दूध से बने हुए पदार्थ, सोना, कपड़े जल का घड़ा आदि दान दें।

इस दिन पार्वती जी का पूजन भी करना चाहिए कहा जाता है की इस दिन स्वर्गीय आत्माओं की प्रसन्नता के लिए जल कलश, पंखा, छाता, सत्तू, कंकड़ी, खरबूजा आदि फल, शक्कर तथा मिष्ठान्न, घृत आदि पदार्थ ब्राह्मण को दान करने चाहिएं जिससे पितरों की कृपा प्राप्त होती रहे।

दोस्तों इस दिन गौ, भूमि, तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, धान्य, गुड़, चांदी, नमक, और शहद आदि वस्तुएं दान करने का महत्व है। जो भी भूखा हो, वह अन्न दान का पात्र है कन्यादान इन सभी दानों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है इसीलिए इस दिन कन्या का विवाह किया जाता है। अक्षय तृतीया पर दान देने वाला सूर्यलोक को प्राप्त होता है। इस दिन किए गए कर्म अक्षय हो जाते हैं।

प्राचीन कथा के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन भगवान शिव ने कुबेर को धन का देवता और मां लक्ष्मी को धन की देवी बनाया था। आप भी धन का वरदान चाहते हैं तो दिल खोल कर करें दान और पाएं कभी न खत्म होने वाले धन का वरदान।