माँ पर सवार हुई बेटे को गौरा बनाने की सनक, पत्थर से स्किन को इतना घिसा मासूम हुआ लहूलुहान

हम एक ऐसे देश में रहते हैं जहाँ लोग गौरा रंग पाने के लिए कुछ ज्यादा ही पागल रहते हैं. वैसे इसमें उनकी भी गलती नहीं हैं. ये गलती हमारे समाज की हैं. यहाँ डार्क या सावली स्किन का होना नीचले दर्जे के रूप में देखा जाता हैं. यहाँ तक की टीवी और न्यूज़ पेपर में आने वाले विज्ञापनों में भी ये दर्शाया जाता हैं कि डार्क या सावली स्किन बुरी हैं और फेयर स्किन अच्छी हैं. बस यही वजह हैं कि गौरा रंग पाने की चाहत में लोग यहाँ तहर तरह की चीजें ट्रॉय करते रहते हैं.

गौरा रंग पाने की दीवानगी से जुड़ा ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला मध्य प्रदेश के शहर भोपाल में देखने को मिला हैं. यहाँ एक माँ के ऊपर अपने 5 साल के बच्चे को गौरा बनाने की ऐसी सनक सवार हुई कि उसने मासूम को पत्थर से घीस घीस के घायल कर दिया. आइए विस्तार से जाने क्या हैं पूरा मामला…

मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक हाल ही में निशातपुरा पुलिस और चाइल्ड लाइन ने एक 5 साल के घायल बच्चे को उसकी सनकी माँ के चंगुल से आजाद किया हैं. आरोपी महिला की पहचान सुधा तिवारी के रूप में हुई हैं. सुधा पर आरोप हैं कि उसने अपने पांच साल के बच्चे को गौरा बनाने के चक्कर में घायल कर दिया हैं. सुधा तिवारी सरकारी स्कूल में एक टीचर हैं, जबकि उनके पति एक प्राइवेट हॉस्पिटल में काम करते हैं.

करीब डेढ़ साल पहले सुधा और उनके पति ने उत्तराखंड के मातृछाया से एक 5 साल के लड़के को अडॉप्ट (गोद) किया था. जब से ये लोग बच्चे को लेकर भोपाल आए थे तब से ही माँ सुधा बच्चे के रंग को लेकर नाखुश थी. बच्चे को गौर बनाने के लिए सुधा ने कई तरह के तरीके अपनाए. हाल ही में उन्हें किसी से पता चला कि यदि काले पत्थर से स्किन को घीसा जाए तो वो गौरी हो जाती हैं. सुधा ने ये नुस्खा अपने 5 साल के मासूम पर ट्रॉय किया और रोज उसकी स्किन काले पत्थर से घिसने लगी. पत्थर घिसने की वजह से कई बार बच्चे की स्किन छिल जाती थी और घाव भी बन जाते थे लेकिन सुधा के सर पर बच्चे को गौरा बनाने का भूत सवार था. उसने ये नुस्खा आजमाना जारी रखा.

जब सुधा की भतीजी (बहन की बेटी) शोभना शर्मा को अपनी मौसी की इस हरकत के बारे में पता चला तो उसने उन्हें रोकने की कोशिश की. शोबना ने अपनी मौसी को कई बार समझाया कि वो बच्चे को पत्थर से घिसना बंद कर दे. लेकिन जब उसकी मौसी नहीं मानी और बच्चे को चोट पहुँचाना जारीर रखा तो शोभना को मजबूरी में चाइल्ड लाइन पर कॉल कर मौसी की शिकायत करनी पड़ी.

शिकायत मिलने के बाद बीते रविवार निशातपूरा पुलिस और चाइल्ड लाइन की टीम सुधा के घर पहुंची और किसी तरह बच्चे को वहां से बचा के ले गई. जानकारी के मुताबिक बच्चे की कलाई, कंधे, पीठ और पाँव पर पत्थर के घर्षण की वजह से कई चोटें आई हैं. फिलहाल बच्चे को हमीदिया हॉस्पिटल में इलाज के लिए भर्ती करवाया गया हैं.

ये काफी दुःख की बात हैं कि लोग ये बात नहीं समझ पाते हैं कि इंसान के मन की सुन्दरता उसकी बाहरी सुन्दरता से कई अधिक मायने रखती हैं.