छोटे बच्चों में तेजी से फ़ैल रहा है ये भयंकर बीमारी, बच्चों में नजर आने वाले इन लक्षणों को भूलकर भी ना करें इग्नोर

आपके घर और आसपास यदि किसी छोटे बच्चे को अमूमन हर दुसरे दिन ही सिरदर्द शिकायत होती हो तो थोड़ा सतर्क हो जाए. ऐसा होना किसी खतरनाक बीमारी का भी संकेत हो सकता है, आजकल की भाग दौड़ भड़ी जिंदगी में केवल एडल्ट्स को ही नहीं बल्कि छोटे बच्चों को भी सर दर्द की शिकायत होती है लेकिन अधिकतर लोग बच्चों में होने वाले सिरदर्द को अनदेखा कर उन्हें अपने मन से ही दावा देने लगते हैं जो की आगे जाकर खतरनाक साबित हो सकता हैं. आज हम आपको बच्चों में इनदिनों पनपने वाले एक बेहद जानलेवा बीमारी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसका यदि समय रहते इलाज नहीं करवाया गया तो ये बच्चों की जिन्दगी एक लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है.

इंडियन मेडिकल ऐसोशिएसन ने किया चौंका देने वाला खुलासा

आपको बता दें की भोपाल के एक चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर अजय सिंह ने बीते दिनों बताया है की इंडियन मेडिकल ऐसोशिएसन लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक हर साला करीबन 50 से 40 हजार लोग ब्रेन टीयूमर के शिकार होते हैं जिनमे से 20 प्रतिशत बच्चे होते हैं. अगर किसी बच्चे को हर आये दिन सर में दर्द की समस्या रहती हो और धुंधला दिखाई देता हो तो ये ब्रेन टीयूमर के लक्षण हो सकते हैं. इसके अलावा अजय सिंह ने बताया की हर साला करीबन 2500 भारतीय बच्चों में एक रेयर किस्म की बीमारी मेदुलोब्लास्टोमा के लक्षण देखने को मिलते हैं जो की बच्चों के लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है. डॉक्टर अजय सिंह के अनुसार ये बच्चों में होने वाला एक खतरनाक ब्रेन टीयूमर है ये बच्चों एक ब्रेन एक साथ साथ उनकी रीढ़ की हड्डी और शारीर के अन्य अंगों में भी फैलाकर उसे बर्बाद कर सकता है. गनीमत है की इस रोग का यदि सही समय पर पहचान कर ली जाए तो 90 प्रतिशत तक इस रोग को ठीक करने के प्रबल चांसेस रहते हैं. लेकिन दुःख की बात तो ये हैं की भारतीय माता पिता बच्चों में होने वाले सर दर्द की समस्या को आम समस्या मानकर इसके इलाज में देरी कर देते हैं जो की बच्चों के लिए जानलेवा साबित होता है.

क्या हैं इस खतरनाक रोग के लक्षण

आपको बता दें की इंडियन मेडिकल ऐसोशिएसन की रिपोर्ट के अनुसार बच्चों में पाए जाने वाले इस टीयूमर के लक्षण अक्सर सबसे पहले सर दर्द के रूप में शुरू होते हैं. इसमें सबसे पहले बच्चों को हर सुबह सो कर उठने पर सर में तेज दर्द की शिकायत होती है. इसके अलावा अक्सर इस रोग से पीड़ित बच्चों को बार बार उल्टी की शिकायत और चक्कर आना, चेहरा सुन्न पड़ जाना और शारीर में वीकनेस जैसी समस्या भी आम होती है. रिसर्च की माने तो इस बीमारी के फर्स्ट स्टेज पर अक्सर डॉक्टर इसे माईग्रेन मानकर इलाज शुरू कर देते हैं क्यूंकि इस रोग को पहचान पाना भी बेहद मुश्किल होता है. अक्सर मेदुलोब्लास्टोमा रोग से पीड़ित बच्चों में चकक्र खाकर गिदना और लकवा मरना जैसी समस्या भी देखी गयी है. आपको बता दें की इस रोग का एक ही इलाज है की बच्चों में डे फर्स्ट से सरदर्द की शिकायत होने पर उन्हें डॉक्टर के पास लेजायें और उनके पूरे ब्रेन सहित शारीर का चेकअप करवाएं.