एक 7 साल की बेटी अपने पिता की जिंदगी बचाने के लिए 2 घंटे तक यूँ ही खड़ी रही सलाइन की बॉटल लेकर

आये दिन हमे सोशल मीडिया पर  सरकारी अस्पताल की लापरवाही की  कहानियां  पढने को मिलती रहती है और इसमें कोई भी सुधार होने का  नाम नहीं ले रही है और सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाएं खुद किस कदर बिमार है इसका अंदाजा इस तस्वीर को देखकर लगाया जा सकता है जो की इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. सरकारें आती है जाती है, गरीबों की हित की बातें और बड़े-बड़े दावे करती है…लेकिन कितने दावें सच साबित होते हैं और कितनों का लाभ गरीबों को आम जनता को मिलता है…उसका अंदाजा ये तस्वीर और छोटी सी बच्ची का दिल ही जानता होगा…जिसे मजबूर होना पड़ा 2 घंटे तक ड्रिप बोतल पकड़ने को…खुद बड़ी-बड़ी गाड़ियों में धूमने औऱ महलों में रहने वाले नेताओं को नीचे देखने की फुर्सत ही कहां होती है.

दिल पसीज जाता है औऱ गुस्सा भी आता है

दिल पसीच जाता है एसी तस्वीरें देखकर औऱ गुस्सा आता है उन नेताओं को देखकरजो सूट-बूट पहनकर पुलिस गार्ड के साथ शान से कार से उतरते हैं और जनता के सामने हाथ जोड़ते हैं. कि हां हम आपके हित में काम कर रहे हैं…और जनता सच मान लेती है.

 तस्वीर सोशल मीडिया पर हो रही वायरल

जी हां इन दिनों सोशल मीडिया पर एक तस्वीर खूब वायरल हो रही है जो की औरंगाबाद के घाटी सरकारी अस्पताल की बताई जा रही है….जिसमें एक छोटी बच्ची ड्रिप स्टैंड बनी हुई है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो छोटी बच्ची के पिता उसके बगल में लेटे हैं जो बिमार हैं…उन्हें ड्रिप चढ़ाना भी जरूरी था लेकिन सरकारी अस्पतालों की और सरकार के दावें की पोल तब खुली जब मरीज को ड्रिप चढ़ाने के लिए स्टैंड नहीं मिला और मरीज की छोटी सी बेटी खुद स्टैंड बन बोतल पकड़कर खड़ी हो गयी.

ड्रिप चढ़ाने के लिए नहीं था स्टैंड

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार औरंगाबाद के एकनाथ गवली को 5 मई को घाटी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। ऑपरेशन के बाद जब उन्हें वार्ड में शिफ्ट किया गया तो वहां ड्रिप के लिए स्टैंड नहीं था। तो डॉक्टर्स ने उनकी 7 साल की बच्ची को बॉटल पड़ा दी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिता की जिंदगी के लिए छोटी मासूम बच्ची करीब 2 घंटे ड्रिप की बोतल पकड़े रही…ये आलम किसी को नजर नहीं आया.

अस्पताल में बेड की संख्या ज्यादा, डॉक्टर कम

वहीं जब ये तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई औऱ खबरों की सुर्खियां बनी तो अस्पताल के डीन ने मामले की जांच करवाई। डीन डॉ. कानन येलिकर का कहना है कि तस्वीर वायरल होने के बाद पूरे मामले की जांच करवाई गई, तो सामने आया कि जिस वक्त डॉक्टर स्टैंड लेने के लिए गया था, उसी दौरान एक एनजीओ से जुड़े लोगों ने ये तस्वीर खींच ली| मिली जानकारी के अनुसार, मराठवाड़ा के 8 जिलों के लोग इस अस्पताल में इलाज कराने आते हैं. यहां क्षमता से अधिक बेड हैं लेकिन डॉक्टरों की संख्या कम है.

गरीबी के चलते सरकारी अस्पताल में कराते हैं इलाज

मरीज के परिजनों ने कहा कि उनकी माली हालत इतनी अच्छी नहीं है कि वह प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा सकें. इसलिए इलाके के सबसे बड़े सरकारी घाटी अस्पताल में इलाज करने का फैसला लिया गया. उन्होंने कहा कि गरीब मरीजों के लिए इस अस्पताल के अलावा यहां कोई और अस्पताल नहीं है.

आपको यह जानकर दुख होगा और गुस्सा आएगा कि सात साल की बच्ची अपने बीमार पिता के लिए 2 घंटों तक हाथ ऊपर की तरफ कर सलाइन की बॉटल हाथ से टांगे खड़ी रही। आप सिर्फ 2 मिनट लगातार हवा में हाथ खड़े रखकर देख लीजिए, आपको उस बच्ची का दर्द समझ में आ जाएगा।