जाने, आईपीएल मैच में चीयरलीडर को मिलते है इतने रूपये,जान नहीं कर पाएंगे यक़ीन

इसमें कोई शक नहीं आईपीएल मैच में या किसी भी मैच में चीयर लीडर का कितना महत्व होता है. जी हां चीयर लीडर मैच के दौरान उस टीम के लिए चीयर करती है, जिस टीम ने बाजी मारी हो. यानि अगर हम सीधे शब्दों में कहे तो ये किसी भी टीम की तरफ नहीं होती. वास्तव में इनका काम केवल डांस करके खिलाड़ियों को चीयर करना होता है. हालांकि इनका काम देखने में जितना आसान लगता है, उतना आसान होता नहीं है. अब वो तो जब आप इस जानकारी को पढ़ेंगे, तब आप खुद बखुद समझ जायेंगे कि आखिर हम ऐसा क्यों कह रहे है. गौरतलब है कि चीयर लीडर का जीवन असल में उतना आसान नहीं होता, जितना आसान हम समझते है.

जी हां यहाँ तक पहुंचने के लिए इन चीयर लीडर्स को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है. तब कही जाकर इन्हे मैच में एंट्री मिलती है. इसके इलावा मैच के दौरान पूरा वक्त उन्हें प्रदर्शन करना ही पड़ता है. बरहलाल उनके प्रदर्शन की वजह से ही न केवल मैच देखने वाले दर्शको बल्कि खिलाड़ियों में भी प्रोत्साहन बढ़ता है. यही वजह है कि मैच के लिए काफी सोच समझ कर चीयर लीडर्स का चुनाव किया जाता है. बता दे कि चीयर लीडर्स मैच के दौरान जो परफॉरमेंस देती है, उसके लिए भी उन्हें काफी कुछ करना पड़ता है. यानि अगर हम सीधे शब्दों में कहे तो चीयर लीडर्स का जीवन मुश्किलों से भरा हुआ होता है, क्यूकि उन्हें भी खिलाड़ियों के साथ उतना ही पसीना बहाना पड़ता है और उतनी ही मेहनत करनी पड़ती है.

हालांकि इन सब के बदले में उन्हें जितना पैसा मिलता है, वो उनके लिए कुछ भी नहीं है. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि हर फ्रेन्चराइज अपनी चीयर लीडर को हर मैच के लिए करीब छह से आठ हजार रूपये तक का औसत भुगतान करता है. वही आईपीएल के दौरान एक ही चीयर लीडर वार्षिक आधार पर पच्चीस हजार डॉलर का औसत कमाती है. इसके इलावा आपको जान कर ताज्जुब होगा, कि आईपीएल मैच के दौरान चीयर लीडर्स को प्रदर्शन करने के लिए केवल पैसा ही दिया जाता है. यानि आईपीएल मैच के दौरान बार बार जगह बदलने, हर फ्रेन्चराइज होटल में रहने, भोजन करने और बाकी यात्रा का खर्च चीयर लीडर्स को खुद ही उठाना पड़ता है.

ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा, कि इतना खर्चा करने के बाद बेचारी चीयर लीडर्स के पास कुछ भी नहीं बचता. जब कि खिलाड़ियों को न केवल शोहरत मिलती बल्कि करोड़ो में पैसा भी दिया जाता है. हालांकि ये सच है कि चीयर लीडर्स का काम खिलाड़ियों जितना मुश्किल नहीं होता, क्यूकि खिलाड़ियों पर अपनी पूरी टीम को साथ लेकर मैच जीतने का प्रेशर होता है. मगर इसमें भी कोई शक नहीं कि अगर चीयर लीडर्स वक्त वक्त पर खिलाड़ियों के लिए चीयर न करे, तो दर्शक भी मैच देख कर बोर हो जाए.

इसलिए हम तो यही कहेगे कि चीयर लीडर्स के प्रति थोड़ा न्याय दिखाईये और इनकी सैलरी में जरा बढ़ोतरी कीजिये. हो सकता है कि सैलरी बढ़ने के बाद उनका जोश ही बढ़ जाए और वो खिलाड़ियों को और ज्यादा जोश से प्रोत्साहित करे.