शहीद पति को पत्नी की अनोखी श्रद्धांजली, SSB परीक्षा क्लियर कर ज्वाइन करने जा रही इंडियन आर्मी

जब भी कोई सेना का जवान शहीद होगा हैं तो हमें दुःख होता हैं. लेकिन हम उस दुःख की कल्पना तक नहीं कर सकते हैं जो उनके परिवार वालो को होता हैं. खासकर कि शहीद की पत्नी की क्या हालत होती होगी आप समझ सकते हैं. शहीद की पत्नी को अपने पति के जाने के गम के साथ उसके परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी भी अकेले ही संभालनी पड़ती हैं. ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे शहीद से मिलाने जा रहे हैं जिसकी पत्नी ने उन्हें बहुत ही अनोखे तरीके से श्रद्धांजली दी हैं.

दरअसल मेजर प्रसाद महादिक बिहार रेजिमेंट की 7वी बतेलियाँ के बेहतरीन ऑफिसर थे. दिसंबर 2017 में अरुणाचल प्रदेश के तवांग में इंडिया चाइना बॉर्डर पर उनके शेल्टर में आग लग जाने की वजह उनका निधन हो गया था. ऐसे में जब मेजर प्रसाद के निधन की खबर उनकी बीवी गौरी को लगी तो उन पर आनो अचानक दुखो का पहाड़ टूट पड़ा. गौरी अपने पति के जाने से दुखी तो थी लेकिन उन्हें पति के आर्य में होने पर काफी गर्व भी था. ऐसे उन्होंने अपने पति को श्रद्धांजली देने का बड़ा ही अनोखा तरीका सोचा. 32 वर्षीय गौरी ने डिसाइड किया कि अब वे भी इंडियन आर्मी में जाएगी और अपने पति की तरह देश की सेवा करेगी.

गौरी एक शिक्षित वकील और कंपनी की सेकेट्री थी. लेकिन अपने पति के जान एके बाद उन्होंने आर्मी में जाने के लिए अपनी ये जॉब छोड़ दी. गौरी का कहना था कि मेरा आर्मी में जाना ही मेरे पति के लिए बेस्ट श्रद्धांजली होगी.  गौरी और मेजर प्रसाद की शादी साल 2015 में हुई थी. इसके बाद वे मुंबई में अपने ससुराल वालो के साथ रहती थी. पति के जाने के बाद उन्होंने सर्विस सिलेक्शन बोर्ड (SSB) की परीक्षा की तयारी करना शुरू कर दी. गौरी ने ये परीक्षा अपने सेकंड अटेम्प में पूरी कर ली. अब गौरी जल्द ही ऑफिसर ट्रेनिंग अकैडमी ज्वाइन करने जा रही हैं. यहाँ उनकी ट्रेनिंग करेब 49 सपताह तक चलेगी. इसके बाद साल 2010 में वे बतौर लेफ्टिनेंट इंडियन आर्मी ज्वाइन करेगी.

गौरी ने बताया कि आर्मी के जवानों की विधवा बीवियों के लिए SSB एग्जाम रखी गई थी. इस एग्जाम में वे विधवा महिलाएं बैठ सकती हैं जिनके पति अपनी सर्विस के दौरान शहीद हुए थे. ऐसे में उन्होंने जब ये एग्जाम दी थी तो इसमें बेंगलुरु, भोपाल और अलाहबाद के सेंटर से कुल 16 लोग सिलेक्ट हुए थे. गौरी बताती हैं कि ये एक लिखित परीक्षा थी जिसका ओरल भोपाल में हुआ था. यहाँ भोपाल सेंटर पर गौरी के साथ बहुत ही दिलचस्प घटना हुई. उन्हें इस दौरान वहीँ चेस्ट नंबर (28) मिला जो उनके पति को कुछ सालो पहले इसी परीक्षा में दिया गया था. यह एक संकेत था कि गौरी का प्रसाद से शादी करना और आर्मी में आना पहले से ही तय था.

गौरी और प्रसाद की ये कहानी बड़ी ही प्रेरणादायक हैं. खासकर कि गौरी की सोच और हिम्मत को हारा दिल से सलाम हैं. दोस्तों यदि आपको ये स्टोरी पसंद आई तो इसे दूसरों के साथ शेयर जरूर करे ताकि वे भी इससे प्रेरीत हो सके.