माँ को कपड़े धोने में होती थी परेशानी, अक्सर बीमार पड़ जाने के कारण बेटे ने महज 1700 में कर दिया ये अदभुत जुगाड़

आमतौर पर हर मिडिल क्लास फैमिली में आज भी लोग कपड़े धोने के लिए हाथ का ही इस्तेमाल करते हैं. आज हम आपको एक ऐसे मिडिल क्लास फैमिली की कहानी बताने जा रहे हैं जहाँ एक बच्चे ने रोज कपड़ा धोने से अपनी माँ को होने वाले तकलीफ से बचाने के लिए एक ऐसा रास्ता अपनाया जिसने सबको चौंका का रख दिया. अपनी माँ को अक्सर कपड़े धोने के बाद बीमार पड़ता देख इस बेटे ने ऐसा इन्वेंशन किया है जिससे इसकी माँ को होने वाली परेशानी का खात्मा होगया. आईये जानते है की आखिर इस बच्चे ने ऐसे किस चीज का इन्वेंशन किया जिसने इसके माँ की कपडे धोने की समस्या को हमेशा के लिए ख़त्म कर दिया.

कपडे धोने से अक्सर माँ बीमार पड़ जाती थी

बता दें की ये खबर मध्य प्रदेश के भोपाल की है जहाँ महज चौदह साल के बच्चे दर्शन से अपनी माँ की तकलीफ नही देखि गयी और उसने अपनी माको रोज रोज होने वाले इस परेशानी से बचाने के लिए कुछ ऐसा बना डाला जिसकी कल्पना हम और आप कर भी नही सकते हैं. आपको बता दें चौदह साल के इस बच्चे की माँ अक्सर कपडे धोने की वजह से वायरल फीवर और सर्दी जुखाम की शिकायत से ग्रसित हो जाती थी . अपनी माँ की इसी के समाधान के लिए इस बेटे ने एक ऐसे उपकरण का अविष्कार किया है जो की साइकिल की सहायता से चलता है. सबसे ख़ास बात ये है की इस बच्चे ने जो उपकरण बनाया है उसे बिना बिजली के मदद से चलाया जाता है और इससे कपड़े भी बिल्कुल किसी वाशिंग मशीन की ही तरह धुलते हैं. भोपाल के छिन्द्वारा जिले का रहने वाला ये 14 साल का लड़का वहां के एक मकैनिक संजय कोले का बेटा है जो की क्लास 8 का स्टूडेंट है. इस बच्चे ने सिर्फ और सिर्फ 1740 रूपये खर्च करके अपनी माँ की तकलीफों का समाधान कर दिया है. इस बच्चे के ऐसे टैलेंट को देखकर आस पास के लोग भी हैरान हैं और सभी दर्शन की तारीफ़ कर रहे हैं.

ऐसे बनाया देशी वाशिंग मशीन

दर्शन से जब पुछा गया की उसे ये देसी वाशिंग मशीन बनाने का ख्याल कैसे आया तो उसने बताया की उसके परिवार में कुल छह लोग रहते हैं और सबके कपड़े उसकी माँ को ही धोना पड़ता था. इस वजह से अक्सर उसकी माँ बीमार रहने लगी थी, दर्शन ने बताया की अपनी बीमार को देखकर उसने ठान लिया था की वो अपनी माँ की परेशानी का हल जरूर निकलेगा. इस चौदह साल के बच्चे ने बताया की इस देशी वाशिंग मशीन को बनाने का प्लान उसके दिमाग में तो था लेकिन उसे किस तरह से उपयोग कर इम्प्लीमेंट करना है इसके लिए उसने अपनी टीचर की मदद ली और उसके टीचर ने ही उसे 1800 रूपये दिए ताकि वो इस वाशिंग मशीन को बनाने के लिए जरूरी सामान बाज़ार से ला सके. दर्शन के अनुसार उसने इसे बनाने के लिए पुरानी साइकिल, एक ड्रम, दो थाली, एक लोहे की रॉड और एक जाली का इस्तेमाल किया है जिससे इसे चलने पर कपड़े बिल्कुल वैसे ही धुलते हैं जैसे की किसी वाशिंग मशीन में उन्हें धोया जाता है.