घर के मंदिर में पूजा करने के ये होते हैं सही तरीके, आज ही जान लें वरना पछताएंगे आप

ये बात तो हम सभी जानते हैं किकि हमारे हिंदूधर्म में पूजापाठ का बेहद ही ज्यादा महत्व है वहीं बात करें परंपराओं और रिति रिवाजों की तो इस धर्म में काफी ज्यादा देखने को मिलते हैं। वहीं आपको बता दें कि जो भी व्यक्ति हिंदू धर्म को मानता है उसके घर में एक छोटा सा मंदिर यानि की पूजा घर जरूर देखने को मिल जाता है। जहां परिवार का हर एक सदस्य हर सुबह स्नान ध्यान करके माथा टेकता है।

घर में मंदिर या पूजा का स्थान नियत होने से तमाम तरह की समस्याएँ स्वतः ही दूर हो जाती हैं। विशेष रूप से स्वास्थ्य तथा मन की समस्याओं का निवारण शीघ्र होता है। इससे घर में आर्थिक समृद्धि बनी रहती है। घर के लोगों में आपसी तालमेल बना रहता है। लेकिन क्या आपको पता है कि घर के मंदिर या पूजा घर में किसी भी भगवान की छवियों या छोटे देवता को रखने के दौरान कुछ नियम हैं जिनका पालन किया जाना चाहिए? याद रखें और उनका पालन करें।मंदिर या पूजा स्थान का पूरा लाभ तभी हो सकता है जब इसकी स्थापना में नियमों का पालन किया जाए।

1. मंदिर में भगवान शिव, गणेश, सूर्य देव, देवी दुर्गा और भगवान विष्णु की कम से कम एक छवि हो।

2. पारिवारिक उन्मुख लोगों को कई देवताओ की पूजा करनी चाहिए और केवल एक भगवान की पूजा नहीं करनी चाहिए।

3. दो शिलिंग, तीन भगवान गणेश, तीन देवी दुर्गा या तीन शालग्राम छवियों या देवता को कभी न रखें। पूजा स्थान का रंग हल्का पीला या श्वेत रक्खें,गाढ़े रंग से बचें।

4. हमेशा स्नान करने के बाद तुलसी पौधे के पत्तों को ले। मंदिर को हमेशा ताजा फूलों से सजाएं। दिव्य माहौल बनाने के लिए सुगंधित मोमबत्तियां, धूप या अगरबत्तियां भी जला सकते हैं।

5. हमेशा भगवान के विभिन्न देवताओं को एक नए कपड़े से साफ करें।

6. मंदिर के पास एक छोटी शेल्फ जरूर होनी चाहिए, ताकि पूजा से संबंधित सामान उसमें रख सकें।

7. मंदिर उस दीवार के सामने नहीं होना चाहिए, जिसके पीछे शौचालय है। अगर ऊपर वाले फ्लोर पर शौचालय है तो उसे नीचे उसके नीचे वाले हिस्से में नहीं रखना चाहिए।

8. सामान्य रूप से पूजा घर या मंदिर घर के ईशान कोण में होना चाहिए। अगर ईशान कोण में ऐसा नहीं कर सकते तो कम से कम पूर्व दिशा का प्रयोग कर लें।

9. जिस देवी या देवता की मुख्य रूप से आप उपासना करते हैं उनके चित्र अथवा मूर्ति की स्थापना एक आसन या चौकी पर करें।

10. तिकोना या गुम्बद वाला मंदिर पूजा स्थान पर रखने के बजाय केवल पूजा की एक छोटी सी जगह बना दें। इसके साथ ही साथ पूजा का स्थान नियत होना चाहिए और उसे बार बार न बदलें।

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