देश की पहली महिला शहिद लेफ्टिनेंट किरण शेखवत की कहानी सुन सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा

दोस्तों सभी हमारे भारत देश में चैन की नींद सौ पाते हैं क्योंकि हमारे देश के जवान सीमा पर हमारी रक्षा के लिए दिन रात डटे रहते हैं. ऐसे में कई बार देश की रक्षा करते करते ये जवान शहीद भी हो जाते हैं. हमारे देश की ख़ास बात ये हैं कि इसकी सेवा करने के लिए सिर्फ पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी आगे होती हैं. आजकल कई महिलाएं सेना में भर्ती होकर देश का नाम ऊँचा कर रही हैं. ऐसे में आज हम आपको देश की एक ऐसी महिला अफसर से मिलाने जा रहे हैं जिसने अपने वतन की रखवाली करते करते अपनी जान भी दांव पर लगा दी. ये महिला भारत की पहली ऑन ड्यूटी शहीद होने वाली महिला अधिकारी हैं. दोस्तों यहाँ हम बात कर रहे हैं भारतीय नौसेना की जाबाज़ लेफ्टिनेंट किरण शेखावत की.

लेफ्टिनेंट किरण शेखावत एक ऐसा नाम हैं जो राजस्थान की लाडली बेटी, हरियाणा की आदर्श बहु और देश की जाबाज़ महिला अफसर रही हैं. लेफ्टिनेंट किरण शेखावत को 24 मार्च 2015 की रात गोवा में डॉर्नियर निगरानी विमान दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के बाद शहादत प्राप्त हुई थी. ऐसे में आज हम आपको बड़े गर्व के साथ इस बहादुर महिला सिपाही के बारे में कुछ बातें बताने जा रहे हैं.

किरण शेखावत का जन्म 1 मई 1988 को  सेफरागुवार नाम के गाँव में विजेन्द्र सिंह शेखावत के घर हुआ था. किरण के अंदर बचपन से ही देश के लिए कुछ कर गुजरने का जजबा था. ऐसे में वे साल 2010 में नौसेना में भर्ती हुई थी. यहाँ वे पूरी जी जान लगाकर ईमानदारी पूर्वक अपनी ड्यूटी निभाती थी. किरण के ऊपर उनके घर वालो को बेहद गर्व था. किरण ने अपने लिए जीवनसाथी भी भारतीय नौसना में लेफ्टिनेंट विवेक छोकर को चुना. विवेक मूल रूप से हरियाणा के मेवात के कुथरला गांव रहने वाले हैं. ऐसे में किरण राजस्थान से ब्याह कर हरियाणा चली गई.

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि किरण के ससुर ससुर श्रीचंद और पिता विजेन्द्र सिंह शेखावत दोनों भी भारतीय नौसेना में पदस्थ रह चुके हैं और वर्तमान में रिटायर्ड हैं. वहीँ किरण की सांस सुनीता देवी अपने गाँव की सरपंच हैं. इसके अलावा किरण की जेठानी राजश्री कोस्टगार्ड की सर्वप्रथम वुमेन पायलट हैं. इस तरह आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इनका पूरा परिवार ही देश के लिए समर्पित रहा हैं.

बहादुर लेफ्टिनेंट किरण शेखावत  24 मार्च 2015 को डॉर्नियर विमान में सवार थी. ये विमान इसी रात गोवा में गुर्घ्तनाग्रस्त हो गया था. इसके बाद दो दिनों तक उनके शव की तलाश चलती रही और फिर 26 मार्च को उसे ढूंढ लिया गया. किरण के अंतिम संस्कार में हजारों लोग आए थे. देश की इस बहादुर महिला को सम्मान देने के लिए हर कोई आगे आ रहा था. उनकी अंतिम बिदाई बड़े ही सम्मान के साथ की गई. उनकी चिता को मुखाग्रि उनके पति विवेक सिंह छोकर ने दी. बताते चले कि 26 जनवरी 2015 को गणतंत्र दिवस के दिन किरण ने राजपथ पर महिला नौसेना टुकड़ी का नेतृत्व भी किया था. किरण भारत देश की एक बहादुर बेटी रही हैं ऐसे में हमारा उन्हें सत सत नमन हैं.

दोस्तों यदि आपको इस बहादुर महिला अफसर की ये कहानी पसंद आई तो इसे दूसरों के साथ शेयर जरूर करे.