इस अनोखे शिवलिंग में छिपा है पाताल जाने का रास्ता, एक लाख से भी ज्यादा है छेद

शिवलिंग को शिवजी का प्रतीक माना जाता है और वैसे तो आमतौर पर दुनिया भर में में हजारों लाखों शिवलिंग हैं लेकिन आज हम आपको एक ऐसे शिवलिंग के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में ऐसा कहा जाता है की इस शिवलिंग से होकर पताल में जाने का रास्ता बना है. आज हम आपको सी अनोखे शिवलिंग से जुड़े कुछ विशेष बातों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे.

इस शिवलिंग में डाला गया पानी सीधे पाताल लोक जाता है

आज हम जिस शिवलिंग के बारे में आपको बताने जा रहे हैं उसकी स्थापना खुद लक्षी ने की थी. बता दें की इस बेहद अनोखे शिवलिंग में लाखों छेद हैं और उन्हीं में से एक छेद से पाताल जाने का रास्ता बना है. यहाँ आने वाले लाखों श्रद्धालुओं का ऐसा मानना है की इस शिवलिंग में लोग जो जल चढ़ाते हैं वो सीधा पाताल लोक में जाता है. हम जिस अनोखे शिवलिंग की बात कर रहे हैं वो दरअसल में छत्तीसगढ़ के खरौद नगर में स्थापित है. खरौद नगर को छत्तीसगढ़ के लोग वहां का काशी भी कहते हैं. यहाँ स्थापित एक मंदिर लक्षिमेश्वर महादेव मंदिर में ही एक ऐसा शिवलिंग स्थापित है जिसमे लाखों छेद हैं और लोगों का मानना है की इन्हीं में से एक छेद पाताल लोक भी जाता है. ये दुर्लभ मंदिर छत्तीसगढ़ की राजधानी से करीबन 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. ऐसा माना जाता है की ये मंदिर खरौद नगर में रामायण काल से ही स्थापित है. कुछ पुरातत्व विशेषज्ञों ने भी इस मंदिर को छह ठी शताब्दी से ही स्थापित माना है, उत्तराखंड के लोगों के बीच इस मंदिर की विशेष महत्ता है और इसलिए यहाँ आने वाले श्रद्धालु भी अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए यहाँ आते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ महादेव की पूजा अर्चना करते हैं.

लक्षमण जी की विनती पर श्री राम ने बनवाया था ये अनोखा मंदिर

आपकी जानकारी के लिए बता दें की इस मंदिर के विषय में कहा जाता है की इसका निर्माण रामायण काल में जब श्री राम जी लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद अयोध्या लौट रहे थे तो छत्तीसगढ़ के खरौद नागर पहुँचने के बाद लक्षमण जी ने राम जी से निवेदन किया की वो यहाँ पर शिव जी के एक मंदिर की स्थापना करें. लक्षमण जी विनती सुनने के बाद श्री राम उन्हें ना नहीं कर पाएं और शिव जी के इस लक्ष्मिनेश्वर मंदिर का स्थापना करवाया. माना जाता है की इस मंदिर की स्थापना के पीछे भी बहुत ही रोचक इतिहास छिपा है, वहां के स्थानीय लोगों का कहना है की श्री राम ने यहाँ पर केवल शिव जी के शिवलिंग का स्थपाना किया था लेकिन इसे एक भव्य मंदिर का रूप वहां के राजा रतन सिंह ने दिया था. इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग में लाखों छेद होने की वजह से इसे लक्षिलिंग मंदिर भी कहा जाता है. इसी शिवलिंग के एक छेद से पाताल जाने का रास्ता भी है, लोगों का ऐसा मानना है की इस शिवलिंग के छेद में जितना भी जल चढ़ाया जाता है वो कभी भरता नहीं है क्यूंकि उसमे एक छेद पाताल की तरफ जाता है और चढाने वाला सारा जल भी उस छेद के रस्ते पाताल में जाता है. हालंकि इस बात के अभी तक कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं लेकिन वहां के लोगों का ऐसा मानना है की शिवलिंग में मौजूद एक छेद का रस्ता पाताल लोक की ओर जाता है.