सावधान: 90 प्रतिशत बोतल के बंद पानी में मौजूद होते हैं प्लास्टिक के कण, जो कर सकते हैं आपको बहुत बीमार

अक्सर लोग जब भी घर से बाहर होते हैं तो प्यास लगने पर प्लास्टिक की पानी की बोतल को मिनिरल वॉटर समझकर उसका इस्तेमाल करते हैं। इससे आपकी प्यास तो बुझ जाती है,लेकिन क्या आपको मालूम है कि ये ना सिर्फ आपकी प्यास बुझा रही है, बल्कि आपके शरीर में कई बिमारियों को भी न्योता दे रही हैं। जी हां, अब आप सोच रहे होंगे कि आखिरकार ब्रांडेड और सील बंद पानी की बोतल में क्या खराबी हो सकती है। तो आपको बता दें कि प्लास्टिक की बोतल में बंद जिस पानी का इस्तेमाल आप कर रहे हैं, उसमें प्लास्टिक के अवशेष हो सकते हैं।

शायद आपको हैरानी हो पर एक रिसर्च में ये दावा किया गया है कि भारत सहित दुनिया के कई देशों में बोतल बंद पेयजल आपके लिए सुरक्षित नहीं है। भारत के साथ- साथ चीन, अमेरिका, ब्राजील, इंडोनेशिया, केन्या, लेबनान, मैक्सिको और थाईलैंड के बोतलबंद पानी के नमूनों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं का मानना है कि माइक्रोप्लास्टिक से विश्व स्तर पर 90 फीसदी बोतल बंद पानी में प्रदूषण बढ़ा है। ये रिसर्च अमेरिका की एक गैर लाभकारी संस्था ओर्ब मीडिया ने किया है। संस्‍था ने अपनी रिर्पोट में दावा किया है कि लगभग 90 प्रतिशत से अधिक बोतल बंद पानी में  प्लास्टिक के अवशेष पाए गए हैं। इनमें पॉलीप्रोपिलीन, नायलॉन और पॉलीथिलीन टेरेफ्थेलेट जैसे तत्व मौजूद रहते हैं। इन सबका इस्तेमाल बोतल के ढक्कन को बनाने में होता है। शोधकर्ता का मानना है कि पानी में ज्यादातर प्लास्टिक पानी को बोतल में भरते समय आता है। यह बोतल और उसके ढक्कन से आ सकता है।

न्यूयॉर्क की स्टेट यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने 27 लॉट में से 259 बोतलों का टेस्ट किया। इसके लिए दिल्ली, चेन्नई, मुंबई समेत दुनिया के 19 शहरों से नमूने लिए गए थे,इनमें प्लास्टिक के कण पाए गए। बोतल में बंद पानी में ना दिखने वाले प्लास्टिक के कणों को देखने के लिए शोधकर्ताओं मे विशेष डाई और नीली रंग की रोशनी का प्रयोग किया। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि लोग इन बोतल बंद पानी का इस्तेमाल इतना ज्यादा करते हैं कि इन कंपनियों का सालाना टर्न ओवर 150 अरब डॉलर है। इनमें मौजूद प्लास्टिक के कण और मनुष्य के लिए नुकसानदायक कई तत्व मौजूद रहते हैं।

रिसर्च में ये दावा किया गया है कि एक दिन में एक लीटर बोतल बंद पानी पीने वाला इंसान उसके साथ प्रतिवर्ष प्लास्टिक के दस हजार तक सूक्ष्म कण ग्रहण कर लेता है। शोधकर्ताओं ने स्पेक्ट्रोस्कोपिक रिसर्च में पाया कि 1 लीटर पानी की बोतल में औसत रुप से 10.4 माइक्रोप्लास्टिक के कम होते हैं। पहले के रिसर्च के मुताबिक यह नल के पानी में पाए जाने वाले माइक्रोप्लास्टिक के कण से दोगुने होते हैं।  यानी कि एक पूर्व स्टडी में बताई गई बात सही है कि नल का पानी बोतलबंद पानी से ज्यादा सुरक्षित है। इस स्टडी में एक्वाफीना, डासानी, इवियान, नेस्ले प्योर लाइफ और सेन पेलेग्रिनो शामिल हैं। इस रिसर्च में अलग- अलग देशों के जिन ब्रांड को शामिल किया गया उनमें एक्वा (इंडोनेशिया), बिसलेरी (इंडिया), ईप्यूरा (मैक्सिको), गेरोलस्टीनर (जर्मनी), मिनालाबा (ब्राजील) और वाहाहा (चीन) शामिल हैं।

अगर आप भी बोतल बंद पानी का इस्तेमाल करते हैं, तो इस रिसर्च को जानने के बाद शायद अब आप भी इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे।