ये गंजी लड़की इंटरनेट पर तेज़ी से हो रही वायरल, समाज को दे रही एक ख़ास संदेश

कुछ लोगो का मनना हैं की किसी भी इंसान को खुबसुरत दिखाने में उसके बाल सबसे बड़ा योगदान करते हैं. खासकर की जब बात लड़की की होती हैं तो उसकी हेयरस्टाइल ही उसकी सुंदरता में चार चाँद लगाती हैं. समाज एक बार गंजे आदमी को स्वीकार कर लेगा लेकिन जब बात एक गंजी लड़की की आती हैं तो उसे कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता हैं. समाज में कम बालो वाले या गंजी हो रही लड़कियों को इज्जत भरी नजरों से नहीं देखा जाता है. ऐसे में कई बार उन्हें मानसिक रूप से भी बहुत कुछ झेलना पड़ता हैं.

इसी बात को ध्यान में रखते हुए बॉलीवुड में एक नई फिल्म आ रही हैं जिसका नाम हैं ‘गोन केश’ यानी बाल चले गए. इस फिल्म में लीड रोल एक्ट्रेस श्वेता त्रिपाठी निभा रही हैं. फिल्म की कहानी कुछ ऐसी हैं की एक लड़की को एलोपेसिया नाम की बिमारी हो जाती हैं. इस बिमारी में व्यक्ति के बाल तेज़ी से झड़ने लगते हैं. इसकी शुरुआत में सर पर गोल आकर के बाल्ड पेच बन जाते हैं. ये बाल झड़ते झड़ते अंत में इस स्टेज पर पहुँच जाते हैं की इंसान पूरी तरह से गंजा हो जाता हैं. हालाँकि इस बिमारी का कोई फिजिकल डेमेज बॉडी को नहीं होता हैं लेकिन मानसिक रूप से पीड़ित व्यक्ति को बहुत कुछ झेलना पड़ता हैं. जब कोई लड़की गंजी हो जाती हैं तो समाज उसके प्रति अपनी सोच बदल लेता हैं. उसे कई तरह की यातनाएं झेलना पड़ती हैं. कई तरह के कमेंट्स सुनने पड़ते हैं. लोग उसके साथ पहले जैसा व्यवहार नहीं करते हैं.

समाज ये भूल जाता हैं की यदि वो लड़की गंजी हुई हैं तो इसमें उसकी कोई गलती नहीं हैं बल्कि उसे एलोपेसिया नाम की एक बिमारी हैं. बस यही संदेश फिल्म में देने की कोशिश की जा रही हैं. इस फिल्म के माध्यम से लोगो की एलोपेसिया नाम की इस बालो की बिमारी के प्रति जागरूक करने की कोशिश की जा रही हैं. ये फिल्म सिनेमाघरों में 29 मार्च को रिलीज होने जा रही हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दे की इस फिल्म की एक्ट्रेस श्वेता त्रिपाठी को आप लोग इसके अहले ‘मसान’, ‘हरामखोर’ फिल्म और वेब सीरिज ‘मिर्जापुर’ में देख चुके हैं. स्वेता एक काफी अच्छी अभिनेत्री हैं. उनके अभिनय की बहुत तारीफ़ होती हैं. श्वेता के बारे में एक और ख़ास बात ये हैं की उनकी उम्र तो 30 के ऊपर हैं लेकिन फिल्म में वे एक स्कूल गर्ल का रोल निभा रही हैं. दरअसल श्वेता को ऊपर वाले ने ऐसा लुक दिया हैं की 30 के ऊपर की होने के बावजूद वो कोई स्कूल गर्ल लगती हैं.

वैसे फिल्म का टॉपिक काफी संवेदनशील और अच्छा हैं. हमें ये बात समझनी चाहिए की इंसान की तन की नहीं बल्कि मन की सुंदरता मायने रखती हैं. फिर उसके सर पर बाल हो या नहीं इससे क्या फर्क पड़ता हैं. वैसे यदि आपको फिल्म का ये संदेश अच्छा लगा तो इसे दूसरों के साथ भी जरूर शेयर करे ताकि वे भी इसे लेकर जागरूक हो सके. और अगली बार आप भी किसी गंजे व्यक्ति का मजाक ना उडाए और ना ही उसके साथ कोई भेदभाव करे.