घर के मुख्य दरवाजे पर सिंदूर लगाना माना जाता है बहुत ही शुभ, जानिए वजह

देखा जाए तो जब भी और जहां से भी सिंदूर का नाम आता है तो सबसे पहले आपके दिमाग में किसी नव-विवाहित महिला की छवि सामने आ जाती होगी क्योंकि हमारे समाज में सदियों से सिंदूर को सुहागन का प्रतीक माना जाता रहा हैं। यदि आप इसके अलावा ध्यान से तो आपको इस बात का पता चलेगा की सिंदूर भगवान श्री राम के परम भक्त हनुमान को भी सबसे ज्यादा प्रिय हैं और यही वजह है की प्रति मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी को सिंदूर अर्पित किया जाता हैं। इसके साथ ही आपको एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात बता दे की कई लोग सिंदूर में तेल मिलाकर अपने घर के दरवाजे पर भी लगाते हैं।

आपको बता दे की ऐसा करने के पीछे ऐसा माना जाता है की दरवाजे पर सिंदूर लगाने से घर में कभी किसी तरह की अशांति नहीं रहती और इसके अलावा घर के सभी दोष आदि दूर हो जाते है। बताना चाहेंगे की ज़्यादातर लोग ऐसा खास कर दीवाली के मौके पर करते है और अपने घर के मुख्य दरवाजे पर सिंदूर लगते है जिसे बहुत ही शुभ माना जाता हैं। इसके अलावा आपको बता दे की दरवाजे पर सिंदूर लगाने के और भी कई सारे वजह बताए गए है जिनके बारे में आज हम आपको बताएँगे।

बताना चाहेंगे की शास्त्रों के अनुसार ऐसा कहा गया है की यदि आप दरवाजे पर सिंदूर लगते है तो ऐसा करने से आपके घर की सभी पीड़ाएँ व कष्ट समाप्त हो जाते हैं साथ ही आपके घर में किसी तरह की नकारात्मक शक्ति प्रवेश नहीं कर पाती है और जो पहले से विद्यमान है उसे बाहर कर देती है। ऐसा भी माना जात अहै की यदि आप दरवाजे पर सिंदूर लगाते है तो इससे आपके घर का वास्तु दोष भी दूर होता हैं। इसके अलावा आपको यह भी बता दे की अगर आपके दरवाजे पर सिंदूर लगाने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, साथ ही सिंदूर में तेल मिलाने से शनि देव भी प्रसन्न होते हैं और तमाम बुरी नजर से रक्षा करते हैं।

ऐसा माना जाता है की सिंदूर लगाने से चेहरे पर कभी भी झुर्रियां नहीं पड़ती। शास्त्रों की माने तो बताया गया है की यदि किसी स्त्री को वैवाहिक जीवन में कोई परेशानी हैं या उसे अपनी दरिद्रता दूर करनी ही तो उसे सिंदूर से अपनी पूरी मांग भरनी चाहिए। आपको जानकार हैरानी होगी की सिंदूर को लेकर आज भी बंगाल में वर्षों की परपरा चली आ रही है जिसके अंतर्गत माँ अम्बे के पवित्र नो दिनों में यहाँ सिंदूर की होली खेली जाती हैं, बता दे की ऐसा कहा जाता है की बंगाल में बिना सिंदूर की होली खेले माँ की पूजा पूरी नहीं मानी जाती है।