क्या रविवार को कभी रखा हैं सूर्यदेव के नाम का व्रत? बस 7 रविवार इस विधि से उपवास रखे और देखे चमत्कार

दोस्तों हमारे हिन्दू धर्म में वैसे तो कई देवी देवताओं का जिक्र हैं. लेकिन इनमे से कुछ देवी देवता ऐसे होते हैं जिन्हें हमारे धर्म में एक विशेष स्थान दिया गया हैं. इन देवी देवताओं की प्रसिद्धि का अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इनके लिए सप्ताह में आने वाले हर दिन को किसी ना किसी के लिए समर्पित किया गया हैं. मसलन सोमवार का दिन शिवजी के लिए, मंगलवार हनुमान जी के लिए., बुधवार गणेश जी के लिए होता हैं तो शनिवार को शनिदेव को पूजा जाता हैं. इसी कड़ी में रविवार का दिन सूर्यदेव के लिए होता हैं.

सूर्यदेव को सबसे तेज़स्वी देव माना जाता हैं. ऐसा कहा जाता हैं कि जिस व्यक्ति के सर पर इनका हाथ होता हैं उसे जीवन में स्वास्थ सम्बंधित कोई भी परेशानी नहीं आती हैं. साथ ही जिस घर में सूर्यदेव की आरधना की जाती हैं उस घर को कभी किसी की बुरी नज़र नहीं लगती हैं. यही कारण हैं कि कई लोग रविवार को सूर्य को जल भी चढ़ाते हैं.

लेकिन यदि आप गौर करेंगे तो हम लोग सप्ताह के हर दिन किसी ना किसी देवी देवता के लिए उपवास जरूर रखते हैं. लेकिन जब रविवार का दिन आता हैं तो बहुत ही कम लोग उपवास करना पसंद करते हैं. लेकिन हम आपको बता दे कि रविवार वाले दिन सूर्यदेव के नाम का व्रत रखने से कई अनगिनत लाभ मिलते हैं. दिलचस्प बात ये हैं कि इस दिन बहुत कम लोग व्रत रखते हैं तो ऐसे में जब आप स्वयं आगे रहकर सूर्यदेव के नाम का उपवास रखते हैं तो वो आप से बड़े प्रसन्न हो जाते हैं और आपका विशेष लाभ भी रखते हैं.

सूर्यदेव के लिए व्रत रखने का तरीका बाकी देवी देवताओं से थोड़ा अलग होता हैं. इस दिन आपको कुछ नियम और कायदों का पालन भी करना होता हैं. इसी बात को ध्यान में रखते हुए आज हम आपको बताएंगे कि सूर्यदेव को प्रसन्न करने के लिए आप किस विधि से इस व्रत को संपन्न करना हैं.

इस विधि से करे सूर्यदेव के नाम का उपवास

रविवार के दिन आँखें खोलते ही हाथो को आपस में जोड़े और पूर्व दिशा की ओर मुख कर सूर्यदेव को प्रणाम करे. इसके बाद आप जितना जल्दी हो सके स्नान कर ले और छत, बालकनी या कहीं और जाकर सूर्यदेव को जल अर्पित करे. जल अर्पित करने के बाद अपने स्थान पर 7 बार घुमे यानी परिक्रमा करे. ध्यान रहे कि जब तक आप सूर्यदेव को जल नहीं चढ़ा लेते तब तक आप कोई भी फलाहार या चाय दूध का सेवन नहीं कर सकते हैं. पानी पीना चाहे तो वो पिया जा सकता हैं.

सूर्य को जल चढ़ाने के बाद दिनभर आपको सिर्फ फलाहार पर ही रहना हैं. हालंकि जो व्यक्ति शारीरिक रूप से कमजोर हैं या बीमार हैं वे एक वक़्त का उपवास भी कर सकते हैं. व्रत रखते समय इस दिन आपको किसी भी तरह के मांस, मदिरा या सिगरेट इत्यादि चीजों का सेवन नहीं करना हैं. साथ ही इस बात का ध्यान रखे कि घर के दुसरे सदस्य भी भी इस दिन कोई मांस मच्छी नहीं बनाए.

शाम को जब सूर्य अस्त होने लगे तब आपको उन्हें दो अगरबत्ती घुमा कर इसे घर के बाहर लगाना हैं. ये सारी प्रक्रियां आप कम से कम 7 रविवार तक कर के देखिए. आपको बहुत लाभ मिलेगा.