3 जून गंगा दशहरा को घर में जरूर करें गंगाजल का ये उपाय छमाछम बरसेगा धन और सुख

जिस गंगा को हिंदू धर्म में मां माना जाता है, जो गंगा हम सभी भक्‍तों पर कृपा बरसाती है आज उसी गंगा को हमें खरीदना पड़ता ये पंडित उसी गंगा के जल को बेचते हैं। हम आपसे यही कहना चाहेंगे कि ऐसा न करें क्‍योंकि गंगा एक नदी नहीं बल्कि हमारी मां है जिसे बेचने का कोई अधिकार नहीं है। बता दें कि गंगा दशहरा ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है क्‍योंकि माना जाता है कि इसी दिन मां गंगा का पृथ्‍वी पर अवतरण हुआ था। इस वर्ष गंगा दशहरा 3 जून को मनाया जा रहा है।

 

 

वैसे तो गंगा के जन्‍म की कई कथाएं पुराणों में मिलती हैं और इन्हीं कथाओं में बताया गया है कि कैसे गंगा ने स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण लिया है। साथ ही गंगा के मानवी रूप में प्रेम की भी बड़े रोचक कथाएं मिलती जिससे स्पष्ट होता है कि गंगा सिर्फ एक नदी की धारा नहीं है बल्कि प्रेम की गंगा है।

वामन पुराण में बताया गया है कि जब भगवान विष्णु ने वामन रूप में अपना एक पैर आकाश की ओर उठाया तो तब ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु के चरण धोकर जल को अपने कमंडल में भर लिया। इस जल के तेज से ब्रह्मा जी के कमंडल में गंगा का जन्म हुआ। ब्रह्मा जी ने गंगा हिमालय को सौंप दिया इस तरह देवी पार्वती और गंगा दोनों बहन हुई। साथ में ये कथा भी बताया गया है कि वामन के पैर के चोट से आकाश में छेद हो गया और तीन धारा फूट पड़ी। एक धारा पृथ्वी पर, एक स्वर्ग में और एक पाताल में चली गई और गंगा त्रिपथगा कहलाईं।

पुराणों के अनुसार गंगा दशहरे के दिन अगर व्यक्ति को किसी भी पवित्र नदी में जाकर स्नान, ध्यान तथा दान करेगा तो इससे वह अपने सभी पापों से मुक्त हो जाएगा। यदि कोई मनुष्य पवित्र नदी तक नहीं जा सकता है तो वह अपने घर पास की किसी नदी पर स्नान करें। इस दिन दान करने से पुण्‍य मिलता है।

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